नई दिल्ली | पूर्व की अटल बिहारी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा के एक लेख ने पुरे देश में हलचल मचा दिया. उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा की नोट बंदी और जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को डुबो दिया है. पहले से खस्ता हाल हो चुकी अर्थव्यवस्था में इन दोनों फैसलों ने आग में घी का काम किया है. यशवंत सिन्हा ने वर्तमान जीडीपी पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा की वर्तमान जीडीपी 3.7 फीसदी से भी कम है.

खुद की ही पार्टी नेता के हमले से हलकान हुई बीजेपी के लिए यह लेख न निगले बन रहा है और न उगले. लेकिन फिर भी मोदी सरकार के सभी मंत्री यह सफाई देने में लगे हुए है की देश की अर्थव्यवस्था सही पटरी पर चल रही है, देश तरक्की कर रहा है. अब इस कड़ी में केन्द्रीय मंत्री और यशवंत सिन्हा के पुत्र जसवंत सिन्हा भी कूद आये है. उन्होंने यशवंत के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की देश की अर्थव्यस्था अच्छे दौर में है.

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जसवंत ने आगे कहा की देश तरक्की कर रहा है. जीएसटी और नोट बंदी जैसे फैसलों का दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगा. एक अख़बार में लिखे लेख में जसवंत ने कहा की जीएसटी, नोट बंदी और डिजिटल पेमेंट एक गेम चेंजिंग कोशिश है , जिसका असर लम्बे समय में दिखेगा. उधर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने के बाद यशवंत सिन्हा पाहि बार मीडिया के सामने आये. उन्होंने पुरे मामले में अपना पक्ष सामने रखा.

उन्होंने कहा की नोट बंदी से पहले बैंकों का 8 लाख करोड़ रूपया एनपीए में फंसा हुआ था. जिसकी वजह से बैंकों ने कर्ज देना बंद कर दिया, अर्थव्यवस्था धीमी हो गयी और इसके बाद नोट बंदी और जीएसटी लागू कर दिया गया. इससे अर्थव्यवस्था और बिगड़ गयी. इसलिए मुझे लगा की यह बात सामने रखनी चाहिए. मेरा मानना है की 40 महीने बीत जाने के बाद किसी और को दोष नही दिया जा सकता.

यशवंत सिन्हा ने जीएसटी पर बोलते हुए कहा की यह 1 जुलाई की बजाय 1 अप्रैल से लागु होनी चाहिए थी. मैं जीएसटी का बीजेपी में सबसे बड़ा पक्षधर रहा हूँ. उस समय जब गुजरात सरकार इसका विरोध कर रही थी तब मैं उस कमिटी में था और इसके काम को आगे बढाया. जो लोग आज इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा सुधार बता रहे है वो उस समय कही पर नही थे.

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