04 08 2018 35 a protest 18278785

सुप्रीम कोर्ट छह अगस्त से संविधान के अनुच्छेद 35ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रहा है। इस सुनवाई के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में विरोध-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में अब राज्य सरकार ने भी स्थानीय और पंचायत चुनावों का हवाला देते हुए सोमवार को होने वाली सुनवाई टालने का आग्रह किया है।

घाटी के अलगाववादियों का आरोप है कि सरकार इस अनुच्छेद को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। हुर्रियत नेताओं ने इसके विरोध में पांच और छह अगस्त को घाटी बंद का एलान किया है। अलगाववादियों ने घाटी में बंद का आह्वान के बाद अमरनाथ यात्रा को दो दिन के लिए रद्द कर दिया गया है।

बता दे कि अनुच्छेद 35ए के प्रावधान जम्मू-कश्मीर के स्थानी नागरिकों को विशेष दर्जा एवं अधिकार देता है। जिसे रद्द करने के लिए दिल्ली स्थित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) वी द सिटिजन ने याचिका दायर की है। यह अनुच्छेद बाहरी राज्य के व्यक्तियों को वहां अचल संपत्तियों के खरीदने एवं उनका मालिकाना हक प्राप्त करने से रोकता है।

Article 35A

यह अनुच्छेद 14 मई 1954 से जम्मू-कश्मीर में लागू है। तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उनके ही आदेश पर ही यह अनुच्छेद पारित हुआ था। 1956 में जब जम्मू कश्मीर का संविधान बना तब इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया।

इस संविधान के तहत स्थायी नागरिक वो व्यक्ति ही है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या 14 मई 1954 से पहले के 10 वर्षों से वहां का नागिरक हो। साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो।

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