देश में बढ़ रही असहिष्णुता के चलते देश के आम लोगों के बीच नफरत बढ़ती ही जा रही हैं. इसी सांप्रदायिक जहरीले माहोल को खत्म करने के लिए देश के सबसे प्रमुख शिक्षण संस्थान जामिया मिलिया इस्लामिया इस मुद्दें पर एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा हैं.

इस प्रोजेक्ट के तहत जामिया मिलिया इस्लामिया का इस्लामी अध्ययन विभाग देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर के छात्रों को सहिष्णुता और सह-अस्तिव के मूल्य समझाएगा ताकि युवा बेहतर समाज के निर्माण में सकारात्मक योगदान दे सकें.

सहिष्णुता और सह-अस्तिव से जुड़े इस्लामी अध्ययन विभाग के प्रोजेक्ट के तहत देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में सेमीनार आयोजित करेगा. जिनमें विभिन्न धर्मों से ताल्लुक रखने वाले विशेषग्य और बुद्धिजीवी छात्रों को धार्मिक सद्भाव और भारत के बहुसांस्कृतिक समाज के महत्व से अवगत कराया जाएगा. इसके साथ ही विश्वविद्यालय छात्रों के लिए एक किताब भी तैयार करा रहा हैं जिसमे  धार्मिक जानकारों के लेख होंगे जो भारत के बहुसांस्कृतिक समाज और मूल्यों को समर्पित होंगे.

जामिया के इस्लामी अध्ययन विभाग के प्रोफेसर और इस प्रोजेक्ट के निदेशक जुनैद हारिस ने भाषा से कहा, देश में कई बार असहिष्णुता और धार्मिक कट्टरता बढ़ने की बात की जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए इस तरह के प्रोजेक्ट की जरूरत महसूस हो रही थी और हमने इसको लेकर प्रयास किया.

उन्होंने कहा, हमने स्नातक में पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ने का फैसला किया है क्योंकि जीवन का यह मुकाम (स्नातक के स्तर का) समाज एवं देश को लेकर दृष्टिकोण बनाने के लिए काफी अहम होता है. हम यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पूजा-पाठ के तौर-तरीकों को छोड़ दें तो समाज के सभी वर्गों के बुनियादी मुद्दे समान हैं. इसलिए हमें धार्मिक टकराव की बजाय सबके महत्व के मुद्दों को हल करने पर ध्यान देना चाहिए.


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