Thursday, August 5, 2021

 

 

 

जमात-ए-इस्लामी पर जम्मू और कश्मीर में लगा प्रतिबंध, देश विरोधी गतिविधियों का आरोप

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केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया। यह कार्रवाई संगठन के देश विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में जुटे होने के कारण गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत की गई है।

गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि जमात-ए-इस्लामी ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो कि आंतरिक सुरक्षा और लोक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। ऐसे में केंद्र सरकार इसे एक विधि विरूद्ध संगठन घोषित करती है। इसके अलावा इसको नफरत फैलाने के इरादे से काम करने वाला एक संगठन भी बताया गया है, जिसके बाद मंत्रालय ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से संगठन को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद सुरक्षा बलों ने अलगाववादी ताकतों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत जमात-ए-इस्लामी के बहुत सारे नेताओं और संगठन कैडर को गिरफ्तार किया जा चुका है।

गत शुक्रवार की रात (22 फरवरी) को पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने छापेमारी कर 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया था। इनमें ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए थे, जिनमें संगठन के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल थे।

संगठन ने दावा किया था कि शुक्रवार की रात पुलिस और अन्य एजेंसियों ने घाटी में कई स्थानों पर छापेमारी कर व्यापक गिरफ्तारी अभियान चलाया। इसमें उसके केंद्रीय और जिला स्तर के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया जिसमें अमीर (प्रमुख) डॉ. अब्दुल हमीद फयाज और वकील (प्रवक्ता) जाहिद अली शामिल थे।

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इस कार्रवाई के बाद महबूबा मुफ्ती ने जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की थी। इसके अलावा पूर्व राज्यमंत्री सज्जाद लोन ने इस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए थे।

महबूबा ने इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अपने ट्वीट में लिखा था कि ‘पिछले 24 घंटे में हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। महबूबा ने कहा कि इस तरह के मनमाने कदम को वह समझ नहीं पा रहीं, जिससे केवल मामला उलझेगा…उनकी गिरफ्तारी किस कानूनी आधार के अंतर्गत की गई है और क्या वह जायज है? आप एक व्यक्ति को जेल में डाल सकते हो लेकिन उसके विचारों को नहीं।’

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