डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने 20 साल की सजा सुना इतिहास रच दिया है. इस दौरान उन्होंने कई तल्ख़ टिप्पणी भी की.

सज़ा सुनाने से पहले रामरहीम ने उनके सामने हाथ जोडक़र रहम की गुहार लगाई, उसने कहा, मैंने समाज सेवा के लिए बहुत कार्य किए हैं. मुझ पर पर रहम किया जाए और कम से कम सजा दी जाए. उसने कहा, जज साहब हम समाज सेवी हैं हमारी सेवा को ध्यान में रखा जाए.

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जिस पर जगदीप सिंह ने बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा, ‘गुरमीत ने जंगली जानवर सरीखा काम किया है उसे अपने ही अनुयायियों के साथ दुराचार किया है और यह माफी के योग्य नहीं है.

उन्होंने अपने आदेश में कहां, ‘दोनों पीड़िताओं ने गुरमीत को ‘भगवान’ का दर्जा दे रखा था. उसे उससे विपरीत बर्ताव नहीं करना चाहिए था.’ जज ने यह भी कहा कि रेप सिर्फ शारीरिक उत्पीड़न नहीं है, बल्कि पीड़िता की पूरी जिंदगी को तबाह कर देता है.

दया की मांग को खारिज करते हुए जज ने कहा, ‘बेवजह दया दिखाने से न्यायिक व्यवस्था प्रणाली को अधिक नुकसान होगा और इससे कानून के शासन पर लोगों को भरोसा कम होगा. उन्होंने कहा, ‘अदालतें बुराइयों को खत्म करने के लिए ही हैं.

उन्होंने आगे कहा, कड़ी सजा के जरिए इस तरह के मंसूबे रखने वाले लोगों को कड़ा संदेश मिलेगा और दोषी भी दोबारा ऐसी हिमाकत करने से पहले सोचेगा. अपराधी में सुधार हो सकेगा और वह कानून का पालन करने वाला नागरिक बनेगा. यह समाज के लिए भी अच्छा है.

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