श्रीनगर: कथित तौर पर पत्थरबाजों से बचने के लिए भारतीय सेना द्वारा घाटी में उप चुनाव के दौरान फारुख अहमद डार व्यक्ति को ढाल बनाए जाने को लेकर पुलिस ने सेना के दावे को गलत करार दिया है.

दरअसल पिछले साल अप्रैल में श्रीनगर की संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव के दौरान बडगाम जिले के चिल बरास गांव के निवासी फारूक अहमद को सेना ने जीप पर बाँधकर घुमाया था. पुलिस ने अपनी जांच में फारुख अहमद डार के पत्थरबाज होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह निर्दोष था.

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जांच रिपोर्ट में कहा गया कि ‘उसे अनुचित रूप से बंधक बनाया गया और (गाड़ी से बांधकर) इलाक़े में परेड कराई गई’.  ध्यान रहे इस घटना का वीडियो बड़े पैमाने पर वायरल हुआ था. जिसके चलते भारतीय सेना की दुनिया भर में आलोचना भी हुई थी.

दो पन्नों की रिपोर्ट हैमें कहा गया है कि 9 अप्रैल को उपचुनाव में बीरवाह पुलिस थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में पत्थराव हो रहा था. डार गमपोरा अपने रिश्तेदार से मिलने गया हुआ था और जब वो गमपोरा से उल्टीगाम क्रासिंग पर पहुंचा तो उसे सेना ने उठा लिया था. उसके बाद गाड़ी के बोनट पर बांध उसे अनुचित रूप से बंधक बना कर इलाके में परेड कराई गई थी.

इस दौरान उसके सीने पर एक पोस्टर भी लगाया गया था, जिस पर लिखा था ‘पत्थरबाजों का यह हाल होगा.’  सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी डार को बांधने वाले मेजर लितुल गोगोई की तारीफ़ भी की थी.

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