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चीनी सीमा पर तैनात आईटीबीपी जवानों को न तो साफ पानी मिल पा रहा है और नहीं बिजली। इस बात का खुलासा गृह मंत्रालय द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, चाइना बॉर्डर पर तैनात आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) की करीब 82% चौकियों (BOP- बॉर्डर आउटपोस्ट चौकियां) पर बेहद ही खराब हालात हैं। इन चौकियों पर जवानों के पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है और 40% चौकियों तक सड़कें भी उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं आईटीबीपी की 177 चौकियों में से 24% पर ही बिजली की सप्लाई है, बाकी 76% चौकियों पर जेनरेटर से ही काम चलाना पड़ रहा है।

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‘वर्किंग कंडीशन इन बॉर्डर गार्डिंग फोर्सेस’ (असम राइफल्स, सशस्त्र सीमा बल, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस और बीएसएफ) शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि चीन बॉर्डर पर मुश्किल हालात में तैनात जवानों को पहाड़ियों पर बहने वाले दर्रों और नालों से पीने के पानी का इस्तेमाल करना होता है। जो काफी प्रदूषित होता है। संसदीय समिति ने सरकार को तुरंत ही जवानों को पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा है।

इससे पहले संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को रोजाना खानपान संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को संसद में पेश रिपोर्ट में समिति ने सरकार को जवानों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि देश के तमाम हिस्सों में कुछ जवान ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर है। समिति ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जवानों को हर हाल में अच्छी गुणवत्ता का भोजन मुहैया कराया जाना चाहिए।

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