Thursday, December 9, 2021

आज देश बच्चो की 36 लाशे देखकर रो पड़ा, सोचिये अगर चीन के साथ युद्ध हुआ तो…

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कोहराम नेटवर्क | शुक्रवार को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई 36 बच्चो की मौत ने पुरे देश को हिला कर रख दिया. इस मामले में अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार की लापरवाही सामने आने के बाद पूरा विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर हो गया. मीडिया रिपोर्ट्स, अस्पताल के कुछ सूत्र और जिले के डीएम के अनुसार अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चो की मौत हुई. लेकिन सरकार यह बात बिलकुल भी मानने के लिए तैयार नही है.

यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जताने की कोशिश की अगस्त के महीने में इस तरह की मौते एक सामान्य बात है. इस दौरान उन्होंने पिछले सालो के मौत के आंकड़े भी पेश किये. यही नही खुद मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने इस मामले को 1978 से सम्बद्ध करते हुए कहा की गोरखपुर में इन्सेफलाइटिस की वजह से काफी मौते हो चुकी है. पहला मामला 1978 में सामने आया था. यह बीमारी चारो और फैली गंदगी की वजह से हो रही है.

सरकार की लापरवाही की वजह से 36 परिवारों के चिराग उजड गए लेकिन सरकार मामले में लीपापोती करने में लगी रही. पुरे दिन सरकार यह छिपाने की भरपूर कोशिश करती रही की ये मौते ऑक्सीजन की कमी की वजह से नही हुई है. चाहे वजह कुछ भी हो लेकिन उन 36 परिवारों के साथ पूरा देश रो रहा है. आखिर कब तक यूँ ही हम इस सिस्टम की भेंट चढ़ते रहेंगे. आखिर सरकार का काम केवल जनता से टैक्स वसूलना और उस पैसे से अय्याशी करना रह गया है. अगर सरकार जनता को मूलभूत सुविधाए भी नही दे सकती तो उनको टैक्स वसूलने का भी कोई अधिकार नही है.

अभी पूरा देश सरकार की लापरवाही की वजह से हुई मौतों पर रो रहा है , आगे स्थिति और भी भयावह हो सकती है. कल्पना कीजिये की अगर चीन के साथ युद्ध शुरू हो जाता है तो दोनों देशो में जान माल की कितनी तबाही हो सकती है. क्या हम और लाशे झेल पायेंगे. चीन को हम कमतर नही अंक सकते, वो दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है. कहा जा सकता है की तबाही चीन में भी काफी होगी क्योकि भारत भी अब 1962 वाला देश नही है लेकिन हमारे देश में ज्यादा तबाही मच सकती है.

फ़िलहाल डोकलाम मुद्दे पर दोनों देशो के बीच तनाव अपने चरम पर है. चीन कई बार युद्ध की धमकी दे चूका है. खबर यह भी है की चीन ने डोकलाम के आस पास के गाँव भी खाली कराने शुरू कर दिए है. तो क्या समझा जाए की हमारा देश युद्ध की स्थिति में लाशो के ढेर पर बैठा हुआ है? मतलब ऐसी स्थिति में देश के नसीब में और आंसू लिखे है. अगर विदेश नीति की बात की जाए तो भारत सरकार चीन मसले को सुलझाने में नाकाम रही है. फ़िलहाल देश एक भयावह स्थिति से गुजर रहा है जहाँ रौशनी की कोई किरण नजर नही आ रही है.

प्रशांत चौधरी

नोट : यह लेखक की निजी विचार है, कोहराम न्यूज़ हिंदी लेखक की कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता.

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