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इस्लाम में औरतों के मजार पर जाने की रोक है। उनको मजार व मस्जिद दोनों ही जगहों पर जाने की मनाही है। सुन्नी बरेलवी मसलक में ऐसा कहा गया है। इस पर आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिल-ए-बरेलवी का फतवा भी है।

दरगाह आला हजरत हजरत स्थित मरकजी दारुल इफ्ता के प्रवक्ता मौलाना शहाबउद्दीन रजवी के अनुसार औरतों का मजार पर जाना इसलिए मना किया गया है कि उनके आने से बहुत सी खराबियां पैदा होने का खतरा है।

आला हजरत के फतवे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार एक शख्स ने आला हजरत से फतवा चाहा था कि मजार पर औरतों के जाने में कितना सवाब मिलता है। इस पर आला हजरत ने कहा कि ये क्या पूछते हो कि कितना सवाब है।  सच तो यह है कि जब औरत मजार पर जाने के लिए घर से निकलती है तो फरिश्ते लानत भेजते हैं। इसकी वजह यह है कि जब औरत मजार या मस्जिद पर जाएगी तो वहां भीड़ लगेगी, खुराफातें होंगी। इसे रोकने के लिए औरत का मजार या मस्जिद में जाना रोका गया है। (अमर उजाला)

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