नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को संयुक्त राष्ट्र का ‘शांति दूत’ नियुक्त किया गया हैं. नोबेल विजेता मलाला UN की अब तक की सबसे कम उम्र की शांति दूत है. इसी के साथ 19 साल की मलाला को संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े नागरिक सम्मान से भी नवाजा गया हैं. UN के महासचिव ऐंतोनियो गुतेरस न्यू यॉर्क मुख्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान 19 वर्षीय यूसुफजई को सम्मानित किया.

इस दौरान मलाला ने कहा, उन्हें अपने मुस्लिम होने पर गर्व है. उन्होंने इस्लाम धर्म को शांति का मजहब बताते हुए कहा कि मीडिया में मुस्लिमों को ‘आतंकवादियों’ एवं ‘जिहादियों’ के तौर पर पेश किया जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को मुझे और उन मुस्लिमों की ओर देखना चाहिए जो शांति के साथ जी रहे हैं तथा जो शांति में विश्वास करते हैं.’’

मलाला अपनी नई भूमिका के तहत दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देंगी. मलाला का कहना है कि आतंकवादियों ने उनकी हत्या करने की कोशिश की थी लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हुए. इसके बाद उन्हें मिली दूसरी जिंदगी में वे लड़कियों की शिक्षा के लिए कुछ करना चाहती। इसके लिे वे काम भी कर रहीं हैं.

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गौरतलब है कि पाकिस्तान की स्वात घाटी में पैदा हुई मलाला उस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई, जब लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ते हुए 9 अक्टूबर 2012 को तालिबान ने उन्हें गोली मार दी. उन्होंने तालिबान द्वारा महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया था.

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