Monday, May 17, 2021

इशरत जहां फर्जी ’मुठभेड़ मामले में सीबीआई अदालत से आखिरी तीन आरोपी भी बरी

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अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई और दो अन्य की जून 2004 में हुई हत्या के मामले में तीन आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया।

तीन पुलिस अधिकारियों – आईपीएस अधिकारी जीएल सिंघल, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी तरुण बारोट, और अंजु चौधरी – ने 20 मार्च को आवेदन दायर किया था। तीनों के बरी होने के साथ, सुनवाई व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गई है, जब तक कि सीबीआई उसी के खिलाफ अपील नहीं करती।

सीबीआई ने पहले चार अन्य अधिकारियों के बरी होने के खिलाफ भी कोई अपील नहीं की थी। विशेष सीबीआई न्यायाधीश वीआर रावल ने यह भी कहा कि “प्राइमा फेशियल, यह सुझाव देने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था कि” इशरत जहां और चार अन्य जो मारे गए थे, “आतंकवादी नहीं थे।”

तत्कालीन डीसीबी वंजारा के नेतृत्व में इशरत जहां, प्राणेश पिल्लै अमजद अली राणा और जीशान जौहर, जिन्हें पाकिस्तानी नागरिक बताकर अहमदाबाद के बाहरी इलाके में 15 जून, 2004 को कोटरपुर वाटरवर्क्स के पास क्राइम ब्रांच द्वारा मार गिराया था। दावा किया गया था कि ये चारों तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने के लिए लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

2013 में दायर अपनी चार्जशीट में, सीबीआई ने सात पुलिस अधिकारियों – पी पी पांडे, वंजारा, एन के अमीन, जे जी परमार, सिंघल, बरोट, और चौधरी को मामले में आरोपी बनाया था। सभी आरोपियों पर हत्या, अपहरण और अन्य आरोपों के साथ सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया था।

फर्जी मुठभेड़ के समय अहमदाबाद शहर के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध), पांडेय को 2018 में बरी कर दिया गया। मई 2019 में, विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में वंजारा और अमीन को आरोपो से मुक्त कर दिया, जबकि परमार के खिलाफ सुनवाई जारी थी। लेकिन सितंबर 2020 में उनकी मृत्यु हो गई।

वंजारा और अमीन को बरी करते समय विशेष सीबीआई अदालत ने इस तथ्य पर काफी हद तक भरोसा किया था कि राज्य सरकार ने दो (वंजारा और अमीन) के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था और इसका सीबीआई द्वारा विरोध या चुनौती नहीं दी गई थी।

20 मार्च को, CBI के विशेष सरकारी वकील ने एक सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें तीनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया, वह है सिंघल, बरोट और चौधरी।

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