अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को इशरत जहां एनकाउंटर केस में चार आरोपी अधिकारियों – जीजी परमार, तरुण बरोट, जीएल सिंघल और अंजू चौधरी द्वारा दाखिल डिस्चार्ज याचिका का निपटारा कर सीबीआई को जांच करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी लेने का आदेश दिया है।

चार में से, जीजी परमार का 21 सितंबर को निधन हो गया और उन्हें इस मामले से हटा दिया गया। इसके साथ ही तीनों आरोपी अफसरों को आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, आरोपी पुलिस अधिकारियों द्वारा मुठभेड़ होने की वजह से आरोपी गंभीर मामले में शामिल हैं।

इशरत जहां सहित प्राणेश पिल्लई और दो अन्य, अमजद अली राणा और जीशान जौहर को 15 जून, 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में कोटारपुर के पानी के पास फर्जी एनकाउंटर में पाकिस्तानी बताकर मार गिराया गया था। अहमदाबाद की अपराध शाखा ने

दावा किया था कि ये चारों लश्कर-ए-तैयबा के सरगना थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के लिए निकले थे। सीबीआई ने मूल रूप से सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 2013 में मामला दर्ज किया था, जिनमें से तीन – पी पी पांडे, डीजी वंजारा और एनके अमीन को बरी कर दिया गया।

सीबीआई कोर्ट को मौजूदा आरोपियों ने बताया था कि सीबीआई को आरोप तय करने से पहले उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने की उम्मीद थी।

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