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राज्यसभा टेलीविजन (आरएसटीवी) इन दिनों खासी बदनामी के दौर से गुज़र  रहा है । आये दिन चैनल पर या तो अपनी गलत रिपोर्टिंग या नौकरी प्रक्रिया में पक्षपात और भक्तिवाद के गंभीर आरोपों के लिए उंगली उठायी जा रही  है।

हाल ही में वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक गद्दार और ब्रिटिश सरकार के सहयोगी के रूप में पेश करने के लिए आरएसटीवी को भारी बदनामी का सामना करना पड़ा है। और यह सब राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के सख्त आदेशों के सीधे उल्लंघन का मामला है। नायडू संसदीय चैनल के सभी प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। इस सब से अब ये शक भी पैदा हो रहा है कि क्या सभापति  में राज्यसभा टी वी के मुखिया हैं या नहीं।

यह तमाशा राज्यसभा में सत्ता के बदलाव के कुछ महीनों के भीतर ही शुरू हो गया जब वेंकैया नायडू ने मोहम्मद हामिद अंसारी के बाद सभापति की गद्दी पर कब्जा किया। नायडू ने तत्कालीन  मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और चैनल के एडिटर-इन-चीफ (ईएनसी) के दोहरे प्रभारी  गुरदीप सिंह सप्पल की सेवाओं को समाप्त कर दिया। साथ ही शशि शेखर वेम्पत्ति  सीईओ, प्रसार भारती को आरएसटीवी के  सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया  और ईएनसी  की नियुक्ति के लिए छह सदस्यीय ‘खोज और चयन समिति’ का गठन कर दिया था। और बस इसके कुछ दिन बाद ही बदले और भाई-भतीजावाद के राजनीति ने सब कुछ खराब का दिया।

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वर्ष 2018 की शुरुआत में ही आरएसटीवी राहुल महाजन की प्रधान संपादक के पद पर नियुक्ति में अनियमिताओं के लिए मीडिया में चर्चित रहा। कुछ महीनों बाद ही कार्यकारी संपादक, कार्यकारी निर्माता, एसोसिएट कार्यकारी निर्माता (http://headline24hindi.com/rstv-another-case-of-discrimination/

https://www.bhadas4media.com/rstv-interview-mei-pardarshita-nahi/) के कई अन्य वरिष्ठ पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठाए गए। आरएसटीवी की अलमारियों में से लगातार छुपे हुए कंकाल लगातार बाहर गिरते रहे। सत्तारूढ़ दल में कुछ लोगों को खुश करने के लिए चैनल में काम कर रहे कुछ पेशेवर पत्रकारों को निकलने में नव -नियुक्त संपादक के दमनकारी तरीकों का ( https://kohraam.com/readers-opinion/rstv-is-becoming-congress-free-138156.html) जिक्र लगातार मीडिया में उठता रहा।

यह सवाल केवल उन नियुक्तियों पर नहीं था बल्कि आरएसटीवी में वित्तीय गड़बड़ियों  (http://www.theworldnewshindi.com/2018/08/20/rstv-the-raag-desh-trial/ ) और यहां तक कि महिला उत्पीड़न के मामलों ( https://kohraam.com/readers-opinion/rstv-rip-vishakha-140011.html ) जैसी कुछ गंभीर शिकायतें भी सामने आईं।

लेकिन सबसे हालिया घटना से बीजेपी सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग भी हैरान परेशान हैं।

16 अगस्त 2018 को जब न सिर्फ देश बल्कि राजनीतिक समुदाय का ज़्यादातर हिस्सा भारत के प्रधान मंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के देश के प्रति समर्पण के गुण गा रहा था , आरएसटीवी वाजपेयी की ईमानदारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहा था  ( http://nationalspeak.in/rstv-question-to-bjp-leader-abt-atal-bajpai/ )।

चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान एसोसिएट कार्यकारी संपादक नीलु व्यास थॉमस ने पत्रकार विजय त्रिवेदी से उस समय के बारे में बताने के लिए कहा जब अटल बिहारी वाजपेयी को ब्रिटिश अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था और उनसे एक माफीनामा लिखने के लिए कहा गया था कि वह भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन या विरोध नहीं करेंगे। स्पष्ट रूप से परेशान त्रिवेदी ने इस सवाल पर लीपापोती करने की कोशिश तो की लेकिन एंकर ने पैनलिस्ट से एक तरह का कबूलनामा निकालने में कामयाब रहे कि अटल ने ब्रिटिश शासक के पक्ष में आंदोलन न करने का वादा किया था।

हालांकि मीडिया में इसकी चर्चा हुई और अंततः आरएसटीवी को चैनल पर माफ़ी चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा ( http://nationalspeak.in/rstv-said-apologize-for-atal-bihari-bajpai/)

अब इस मामले को तो यहीं खत्म  जाना चाहिए था। लेकिन वाजपेयी पर आरएसटीवी माफी ने उत्तर देने से ज्यादा प्रश्न उठा दिए।

मामले के बारे में जानकार सूत्रों ने पुष्टि की है कि मीडिया में आरएसटीवी की  चर्चा होने  के बाद सभापति  वेंकैया नायडू ने संपादक राहुल महाजन को इस भारी चूक के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने बहुत स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यक्रम और एंकर के नाम से आरएसटीवी को माफीनामा चैनल पर होगा। यह भी पुष्टि की गई है कि नायडू ने निर्देश दिया कि नीलू थॉमस को चेतावनी दी जानी चाहिए और फिलहाल एंकरिंग असाइनमेंट नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन सूत्र बताते हैं कि नायडू के थॉमस के बारे में स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उसे कुछ नहीं कहा गया  एक और बड़े एंकरिंग असाइनमेंट के लिए अनुमोदित कर दिया गया।

आरएसटीवी के भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम को बदनाम करने के लिए माफी मांगने के एक दिन के बाद ही गलती करने वाले सभी लोगों को एक और बड़े  कार्यक्रम के लिए मंजूरी दे दी गई। संपादक राहुल महाजन ने  अगले ही दिन थॉमस को शिक्षक दिवस पर एक कार्यक्रम तैयार करने के लिए कहा था। कार्यक्रम 1 सितंबर 2018 को रिकॉर्ड किया जाना है।  यह साभापति  के प्रत्यक्ष आदेशों की स्पष्ट अवमानना है। सूत्रों ने अब खुलासा किया है कि यह राज्यसभा सचिवालय में निरंकुश फैसलों का एकमात्र मामला नहीं है।

मार्च 2018 के बाद, नए संपादक के आने के बाद से ही आरएसटीवी से कई मनमानीपूर्ण  बर्खास्तगी हुई हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सीईओ, अतिरिक्त सचिव और महासचिव की मंजूरी के बिना ये संभव नहीं थे। और सभापति नायडू  के आदेश का कोई भी संशोधन केवल ईएनसी या सीईओ द्वारा नहीं किया जा सकता है।

अब अगर अध्यक्ष ने कार्यक्रम के नाम और एंकर के  साथ माफी चलाने के लिए आदेश दिया था तो एंकर का नाम हटाने का निर्णय सीईओ और एसजी की मंजूरी के बिना संभव नहीं हो सकता।

इस तरह की घटनाओं ने इस बात पर संदेह पैदा हो जाता है कि क्या वेंकैया नायडू सही में राज्य सभा टीवी के मामलों को चला रहे हैं या वहां कुछ ‘अदृश्य हाथ’ उनके दफ्तर में कब्ज़ा किये बैठे हैं।

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