विवादित सलाफी स्कॉलर जाकिर नाईक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) ने आज केंद्र सरकार की उस अर्जी का विरोध किया जिसमे सरकार की और से बंद कमरे में सुनवाई करने की बात कही गई.

आईआरएफ ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सहगल के सामने दलील दी कि बंद कमरे में सुनवाई की सरकार की अर्जी इस संगठन पर पाबंदी लगाने के लिए विश्वास की गयी सामग्री से वंचित करने का बहाना है. आईआरएफ की और से प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया हैं.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने यह दावा करते हुए बंद कमरे में सुनवाई पर जोर दिया कि संबंधित विषय संवेदनशील है और ऐसी संभावना है कि उसे न्यायाधिकरण में सुनवाई के दौरान उद्घाटित किया जा सकता है. हालांकि बंद कमरे में सुनवाई की सरकार की अर्जी पर अदालत 23 फरवरी को आदेश जारी करेगी.

वहीँ आईआरएफ के वकील ने कहा कि संगठन पर तत्काल पाबंदी लगाने के लिए जिस सामग्री पर भरोसा किया गया, उसका खुलासा अधिसूचना में किया जाना चाहिए था. इस सामग्री में से कुछ भी आईआरएफ को अब तक नहीं दिया गया है.


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