अयोध्या में बाबरी मस्जिद के स्थान पर धन्नीपुर में प्रस्तावित जमीन पर बनने वाली मस्जिद के डिजाइन को बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने खारिज कर दिया। उन्होने कहा कि प्रस्तावित मस्जिद के डिजाइन में एक भी बिंदु इस्लामिक संस्कृति या धार्मिक संरचना के अनुसार नहीं है।

उन्होने कहा कि विदेशों की तर्ज पर मस्जिद की डिजाइन दी गई है, हम भारत के लोग हैं और हम भारतीय शैली पर मस्जिद को स्वीकार करेंगे। उन्होंने मांग की कि मस्जिद निर्माण के लिए गठित किया गया ट्रस्ट मुसलमानों की भावनाओं की कद्र करते हुए हिंदुस्तानी शैली पर मस्जिद का निर्माण कराए।

अंसारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दी है तो उसके संरचना को भारत में निर्मित मस्जिदों से मिलना चाहिए। उन्होंने जो नक्शा दिखाया है उसकी कोई संरचना नहीं है। मस्जिद या मंदिर में एक शिष्टाचार होता है, और यदि कोई मंदिर शिवाला के बिना है, तो इसे मंदिर नहीं माना जाएगा। सब कुछ धार्मिक परंपराओं के अनुसार होना चाहिए। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि यह नमाज अदा करने और पिकनिक का आनंद नहीं लेने के लिए एक जगह है।

इस पर ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि मस्जिद के लिए बनाई गई डिजाइन की कोई प्रतिकृति वास्तुकला नहीं थी, और उनकी अवधारणा एक समन्वित संस्कृति के विचार को बढ़ावा देना है। हमें इस जमीन पर मस्जिद, अस्पताल, म्यूजियम और पुस्तकालय बनाने का अधिकार है।

इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सदस्य जफरयाब जिलानी ने इस प्रस्तावित मस्जिद को वक्फ अधिनियम और शरियत के खिलाफ करार दिया। उन्होने कहा कि “वक्फ अधिनियम के तहत मस्जिद या मस्जिद की जमीन किसी दूसरी चीज के बदले में नहीं ली जा सकती। अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद इस कानून का उल्लंघन करती है। यह शरियत कानून का उल्लंघन करती है क्योंकि वक्फ अधिनियम शरियत पर आधारित है।”

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