Tuesday, January 25, 2022

कश्मीर में इंटरनेट बैन और धारा 144 पर बोला सुप्रीम कोर्ट – नहीं चलेगी सरकार की मनमर्जी

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नई दिल्लीजम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद घाटी में इंटरनेट और लोगों की आवाजाही बंद करने जैसी पाबंदियों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने साफ कहा कि बिना वजह के पूरी तरह इंटरनेट पर रोक नहीं लगाया जा सकता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर पूरा बैन लगाना बहुमत सख्त कदम है। लोगों को अपनी असहमति जताने का हक है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गैर जरूरी आदेश वापस लेने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की आजादी को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है, जो हमें संविधान का अनुच्छेद 19(1) प्रदान करता है। इस पर प्रतिबंध और रोक भी उसी आधार पर लगनी चाहिए, जैसा संविधान में बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट एक तरह से इंटरनेट के इस्तेमाल को अभिव्यक्ति की आजादी को प्रदर्शित करने वाले औजार की तरह देखता है। ये इंटरनेट पर सुप्रीम कोर्ट पर बहुत बड़ी रुलिंग है। जिसे बारीकी से समझा जाना चाहिए।

जस्टिस रामना ने कहा है कि कोर्ट को कश्मीर में रोक लगाने के राजनीतिक मंसूबे और मकसद से कोई लेना देना नहीं है। रामना ने कहा कि आजादी और सुरक्षा हमेशा एकदूसरे से भिड़े रहते हैं। ये कोर्ट की जिम्मेदारी बनती है कि सभी नागरिकों को उनके अधिकार और सुरक्षा हासिल हो। कोर्ट ने कहा कि असहमति का मतलब अस्थिरता फैलाना नहीं है। कोर्ट के विचार में राज्य को इंटरनेट को पूरी तरह से शटडाउन करने को आखिरी और असाधारण उपाय की तरह देखना चाहिए।

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, ‘’धारा 144 लगते समय भी गहराई से विचार होना चाहिए.’’ कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह सभी आदेश प्रकाशित करे। भविष्य में भी ऐसा हो ताकि किसी के लिए उसे चुनौती देना आसान हो। कोर्ट ने कहा, ‘’इंटरनेट पर एक समय सीमा के लिए ही रोक लगनी चाहिए और बीच-बीच में समीक्षा होनी चाहिए।’’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार अपने सभी आदेशों को दोबारा देखे। जो गैरज़रूरी हैं, उन्हें वापस ले। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सा जैसी आपातकालीन बुनियादी सेवाओं में कोई बाधा न आए और सरकार सभी तरह के आदेशों की समीक्षा करे और उन्हें प्रकाशित करे। कोई भी आदेश न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है।

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