महंगाई पर काबू करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार को बढ़ती महंगाई की कोई फ़िक्र ही नहीं है. पहले से ही महंगाई की मार झेल रही देश की जनता को दोहरी मांग पड़ी है.

दरअसल, सीपीआई आधारित खुदरा महंगाई में तो इजाफा ही हुआ है वहीं औद्योगिक विकास दर में भी गिरावट आई है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 3.58 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी हो गई.

खुदरा महंगाई नवंबर से 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर है. खुदरा महंगाई का पिछला उच्च स्तर 2016 अगस्त में रहा था, जब सीपीआई 5.05 पर्सेंट रहा था. ऐसे में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखी गई है.

इसी के साथ नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में भी गिरावट आई है. अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) दर 2.2 फीसदी रही, जो पिछले महीने में 3.8 फीसदी थी.

वरिष्ठ अर्थशास्त्री तुषार अरोड़ा ने कहा, ‘सब्जी के दाम बढ़ने का उम्मीद से कहीं ज्यादा असर हुआ है. हमारा अब मानना है कि वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 की शुरुआत में भी महंगाई 4% से ऊपर रह सकती है.’

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