Thursday, January 20, 2022

गूगल, उबर, और फेसबुक में काम करने वाले भारतीयों ने CAA के विरोध में लिखा खुला पत्र

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सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध बढ़ता ही जा रहा है। अब गूगल, उबर, अमेजन और फेसबुक जैसी कंपनियों में काम करने वाले  भारतीय मूल के कुछ पेशेवरों ने इस कानून के खिलाफ विरोध जताते हुए एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में इन दोनों को सरकार का ‘फासीवादी’ कदम बताया गया है।

इतना ही नहीं पेशेवरों ने सुंदर पिचाई, सत्य नाडेला और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गजों को पत्र लिखकर भारत सरकार के इस ‘फासीवादी कदम’ के खिलाफ रुख अपनाने और सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करने का आग्रह किया है।

ऑनलाइन प्रकाशन प्लेटफार्म मीडियम पर ‘फासीवाद के खिलाफ प्रौद्योगिकीविद्’ शीर्षक से डाले गए पत्र में नेताओं से सरकार के निर्देश पर इंटरनेट बंद करने से इनकार करने और यह सुनिश्चित करने को अनुरोध किया गया है कि सामग्री को संतुलित करने का काम ऐसा न हो कि उसमें सरकार की ओर झुकाव हो।

पत्र में लिखा गया है, ‘हम प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े इंजीनियर, शोधकर्ता और डिजाइनर फासीवादी भारत सरकार और प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर हो रही बर्बर कार्रवाई की पुरजोर निंदा करते हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य प्रायोजित बर्बर कार्रवाई तत्काल रोकी जानी चाहिए।’ इन कर्मचारियों ने यह भी लिखा है कि ये विचार उनके स्वयं के हैं और उनके नियोक्ताओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इन कर्मचारियों का दावा है कि ये सैन फ्रांसिस्को, सिएटल, लंदन और बेंगलुरू जैसे जगहों पर काम कर रहे हैं। पत्र के अनुसार, ‘सीएए और एनआरसी मुसलिम विरोधी है और इससे मुसलमानों के खिलाफ असामानता बढ़ेगी।

कर्मचारियों ने सुंदर पिचाई (अल्फाबेट), सत्य नडेला (माइक्रोसाफ्ट), मार्क जुकरबर्ग (फेसबुक), जैक डोरसे (ट्विटर), डारा खोसरोवशाही (उबर), मुकेश अंबानी (जियो), गोपाल विट्टल (भारती एयरटेल), कल्याण कृष्णमूर्ति (फ्लिपकार्ट) और शांतनू नारायण (एडोब) जैसे दिग्गजों को पत्र लिखकर भारत सरकार के इस ‘फासीवादी कदम’ के खिलाफ रुख अपनाने और सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करने का आग्रह किया है।

पेशेवरों ने उद्योग के दिग्गजों से प्रौद्योगिकी का बेहतर कार्यों के लिए उपयोग करने, उपयोगकर्ता का ब्योरा सरकार के साथ साझा करने से इनकार करने, सरकार के निर्देश पर इंटरनेट सेवाएं बंद करने से मना करने, नागरिकों को एकत्रित करने के साधन उपलब्ध कराने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि इंटरनेट की सामग्री में इस रूप से बदलाव नहीं किया जाए जिससे वह सरकार समर्थक दिखें।

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