नई दिल्ली | पिछले कुछ सालो में देश की मीडिया के बारे में लोगो के ख्याल काफी बदल गये है. अब लोग मीडिया को स्वंतंत्र और निष्पक्ष इकाई नही मानते. उनका मानना है की मीडिया भी किसी न किसी राजनितिक दल की विचारधारा से या तो प्रेरित हो गया है या फिर उसने अपने हित साधने के लिए उस दल की विचारधार को धारण कर लिया है. अब दुनिया भर की मीडिया पर नजर रखने वाली एक संस्था ने भी यह बात मानी है.

दुनिया भर के अलग अलग देशो में मीडिया की स्थिति अलग अलग है. वो किस देश में कितनी आजाद है , इस पर नजर रखने के लिए ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ नामक एजेंसी हर साल एक रिपोर्ट जारी करती है. इस रिपोर्ट में भारतीय मीडिया को 136वा स्थान प्राप्त हुआ है. दुनिया के 180 देशो के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत को यह स्थान प्राप्त हुआ है.

रिपोर्ट जारी करते हुए रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोएरे ने कहा की दुनिया भर की मीडिया की स्वंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है. भारत में भी इसी तरह के हालात है. यहाँ हिन्दू राष्ट्रवादियो की धमकी की वजह से भारतीय पत्रकारों की स्वंत्रता को धक्का लगा है. अब उन पर स्वतंत्र पत्रकारिता नही करने का दबाव है. इसी वजह से भारतीय मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप का भी रुझान बढ़ा है.

क्रिस्टोफ डेलोएरे ने कहा की यह उन लोगो के लिए खतरे की घंटी है जो यह मानते है की मीडिया की आजादी के बाद अन्य तरह की आजादी भी सुरक्षित नही होगी. बताते चले की पिछले साल भारत इस इंडेक्स में 133वे नम्बर पर था. इस लिस्ट में अमेरिका और कनाडा की स्थिति भी ठीक नही है. जहाँ अमेरिका को 43वा तो कनाडा को 22वा स्थान प्राप्त हुआ है. इस सूची में नार्वे को पहले नम्बर पर रखा गया है.

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