Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

मोदी सरकार ने अब खुद माना – देश में 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी

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मोदी सरकार की ताजपोशी के अगले ही दिन शुक्रवार को सांख्यिकी मंत्रालय ने देश में बेरोजगारी के आकडे जारी किए। जिसमे बताया गया कि देश में साल 2017-18 के दौरान बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी थी।

आपको बता दे कि आम चुनाव से पहले बेरोजगारी के आंकड़ों पर जो रिपोर्ट लीक हुई थी शुक्रवार को सरकारी आंकड़ों में उसकी पुष्टि हो गई।  मंत्रालय ने कहा कि जनवरी में छपी बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट सही थी। जिसमें कहा गया था कि देश में 1972-73 के बाद से भारत में बेरोजगारी दर अपने उच्चतम स्तर पर थी।

हालांकि सरकार ने अभी भी बेरोजगार दर के लिए तुलनात्मक नंबरों की संख्या बताने से इनकार कर दिया। मामले में मुख्य सांख्यिकीविद् प्रवीण श्रीवास्तव ने पत्रकारों से कहा, ‘यह एक नई डिजाइन, नई मीट्रिक है… अतीत के साथ इसकी तुलना करना सही नहीं होगा।’

गौरतलब है अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड, जिसने जनवरी में लीक रिपोर्ट के हवाले से बेरोजगारी के आंकड़े जारी किए, ने कहा था कि यह नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) ऑफिस द्वारा जुलाई 2017 और जून 2018 के बीच किए गए एक आकलन पर आधारित रिपोर्ट थी। अखबार ने उस वित्तीय वर्ष के लिए आंकड़ा दिए बिना रिपोर्ट दी कि भारत में बेरोजगारी दर 1972-73 के बाद से सबसे अधिक थी।

सांख्यिकी मंत्रालय ने यह भी कहा कि दिसंबर 2018 में समाप्त होने वाली तिमाही में शहरी क्षेत्रों में महिला श्रम भागीदारी दर 19.5 प्रतिशत थी, जबकि पुरुषों के लिए यह 73.6 प्रतिशत थी। गौरतलब है कि बेरोजगारी संख्या के साथ शुक्रवार को एक और डेटा जारी किया गया, जिसमें दिखाया गया है कि अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च की अवधि में 5.8 फीसदी बढ़ी, यह इसकी 17 तिमाहियों में सबसे धीमी गति, और लगभग दो सालों में पहली बार चीन की गति के पीछे गिर गई।

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सरकार द्वारा जारी इन आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रोजगार योग्य युवाओं में 7.8 प्रतिशत बेरोजगार रहे जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 5.3 प्रतिशत रहा। अखिल भारतीय स्तर पर पर पुरूषों की बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत जबकि महिलाओं के मामले में 5.7 प्रतिशत रही।

विकास दर में गिरावट और बेरोजगारी की दर पिछले 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस समस्या का समाधान निकालने के लिए कारगर कदम उठाएंगे। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, ‘आर्थिक विकास में गिरावट आई है और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हम आशा करते हैं कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री विकास के इंजन को गति देने और रोजगार पैदा करने की रणनीति बनाने के लिए लघुकालीन और दीर्घकालीन रूपरेखा तैयार करेंगे।’ गौरतलब है कि कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन के चलते वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़कर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी।

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