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अफगानिस्तान में शांति बहाली की कोशिशों के बीच भारत की तालिबान के साथ बातचीत करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि तालिबान की और से बातचीत में 1999 में IC-814 विमान हाईजैक करने के आरोपी शामिल हुए है।

इस मामले में अब विदेश मंत्रालय की सफाई आई। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि तालिबान के साथ वार्ता ‘गैर-आधिकारिक’ है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि, ‘हमने कहां कहा कि भारत तालिबान से बातचीत करेगा? हमने नहीं कहा कि भारत तालिबान से बातचीत करेगा।’ इसके अलावा उन्होंने यह साफ कर दिया बैठक में भाग लेने के लिए भारत बाध्य था। हमने गैर आधिकारिक स्तर पर बैठक में भाग लेने पर विचार किया।

गौरतलब है कि कतर में तालिबान की राजनीतिक परिषद के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तनाकजई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में भाग लिया, सिन्हा और राघवन इस बैठक में मौजूद थे। भारत के अलावा, मॉस्को की बैठक में अमेरिका, पाकिस्तान, चीन, ईरान और कुछ मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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दूसरी और रूस के विदेश मंत्री सर्जेइ लावरोव ने अफगानिस्तान पर दूसरी मास्को बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि रूस और क्षेत्र में स्थित अन्य सभी देश अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच वार्ता स्थापित करने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे। तालिबान रूस में प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दों का समाधान सिर्फ राजनीतिक साधनों के माध्यम से किया जा सकता है।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘‘तास’ ने लावरोव के हवाले से कहा, ‘अफगानिस्तान के इतिहास में एक नया अध्याय खोलने के लिए हम हर संभव प्रयास करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।’ सभा को संबोधित करते हुए लावरोव ने कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य राष्ट्रीय सुलह-सफाई प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक समावेशी अंतर-अफगान वार्ता को विकसित करना है।

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