भारत ने खारिज की अमेरिकी रिपोर्ट – मॉब लिंचिंग और गोरक्षकों की गुंडागर्दी पर की थी आलोचना

5:48 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली: भारत ने अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी उस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिसमें  भीड़ हिंसा, धर्म परिवर्तन और देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए गए थे।

इस रिपोर्ट पर जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत को विदेशी रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं दिखती है जो हमारे नागरिकों जिनके आधिकार संविधैनिक रूप से संरक्षित हैं, पर दावा कर रही है। आपको बता दें कि यह रिपोर्ट अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से ‘इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ पर एक रिपोर्ट जारी की गई है।

इस रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने जवाब देते हुए कहा, भारत को अपनी धर्मनिरपेक्षता पर गर्व है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज वाला देश है जो लंबे समय से सहिष्णुता और समावेश के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को उनके मूलभूत अधिकारों की गारंटी देता है, जिसमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं।

उन्होने कहा, यह पूरी तरह से सर्वविदित है कि भारत एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है जिसका संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का संरक्षण देता है, और लोकतांत्रिक सरकार धार्मिक गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देती है। हम किसी भी विदेशी संस्था या सरकार को यह अधिकार नहीं देते हैं कि संवैधानिक रूप से मिले अधिकारों से संरक्षित हमारे नागरिकों को लेकर कोई घोषणा करे।

बता दें कि रिपोर्ट में कहा गया, भारत की केंद्र और राज्य सरकार ने मुस्लिम प्रथाओं और संस्थानों को प्रभावित करने वाले निर्णय लिए हैं। सरकार ने मुस्लिम शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे पाठ्यक्रम संबंधी निर्णयों और भर्ती की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। देश में मुस्लिम नाम वाले शहरों के नाम बदलने की भी बात कही गई है। इसमें सबसे प्रमुख इलाहाबाद को प्रयागराज करना शामिल है।

एक्टिविस्टों का कहना है कि यह भारतीय इतिहास में मुसलमानों के योगदानों को मिटाने का प्रयास है। इससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा। रिपोर्ट में सांप्रदायिक हिंसा, दंगों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर प्रथाओं का पालन करने में बाधा की बात को भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रशासन गौरक्षकों के हमलों को रोकने में असफल रहा है। इसमें भीड़ हिंसा, लोगों को डराने-धमकाने और लोगों की हत्या तक शामिल है।

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