ट्रांसपेरेन्सी इन्टरनेशनल की ताजा रपट में दावा किया गया कि भारत में रिश्वतख़ोरी का एशिया में सबसे ज्यादा चलन है। यह रिपोर्ट भारत में 17 जून से 17 जुलाई के बीच किए गए सर्वे पर आधारित है। इसमें 2,000 लोगों को शामिल किया गया था।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। ये एशिया में सबसे ऊंची रिश्वत की दर है। नेपाल में यह दर 12 प्रतिशत, बांग्लादेश में 24, चीन में 28 और जापान में दो प्रतिशत पाई गई।

सर्वे के अनुसार, 47 फीसदी लोग मानते हैं कि पिछले 12 महीनों में भ्रष्‍टाचार बढ़ा है। वहीं 63 फीसदी लोगों का मानना है कि देश की सरकार भ्रष्‍टाचार से निपटने के लिए अच्‍छा काम कर रही है। इस सर्वे के अनुसार, देश में सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए 46 फीसदी लोगोंने निजी कनेक्‍शंस का सहारा लिया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार रिश्‍वत देने वाले करीब आधे लोगों से घूस मांगी गई थी। हालांकि निजी कनेक्‍शंस का इस्‍तेमाल करने वालों में से 32 फीसदी का मानना है कि अगर वह घूस नहीं देते तो उनका काम नहीं बनता। सरकारी कर्मचारी रिश्‍वतखोरी के मामले में और कोर्ट में बैठे 20 फीसद जज भ्रष्‍ट हैं।

एशियाई देशों में करेप्‍शन रेटिंग की बात करें तो इस पूरे क्षेत्र के 23 फीसद लोग पुलिस को सबसे अधिक भ्रष्‍ट मानते हैं। दूसरे नाम पर 17 फीसद वो लोग हैं जो मानते हैं कि कोर्ट सबसे अधिक भ्रष्‍ट है। 14 फीसद एशियाई मानते हैं क‍ि ऐसी जगह जहां पर पहचान पत्र बनते हैं वहां पर सबसे अधिक भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है।

इस साल जनवरी में ही ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से दावोस में हुए वर्ल़्ड इकनॉमिक फोरम में करप्शन परसेप्शन इंडेक्स जारी किया गया था। इसमें 180 देशों की लिस्ट में भारत को 80वें नंबर पर रखा गया था।

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