hunger

नई दिल्ली । मोदी सरकार के तमाम दावों के बीच देश में भुखमरी की स्थिति और ख़राब होती जा रही है। 2018 की ग्लोबल हंगरी इंडेक्स में भारत की स्थिति श्रीलंका और बांग्लादेश से भी ख़राब है। चौकाने वाली बात यह है की मोदी सरकार बनने के बाद से यह और खराब हुई है। फ़िलहाल भारत को 119 देशों में  103वा स्थान मिला है। जो पीछले साल के मुक़ाबले 3 स्थान नीचे है।

पीछले साल भारत ग्लोबल हंगरी इंडेक्स में 100वे नम्बर पर था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ‘2018 बहुआयामी वैश्विक गरीबी सूचकांक’ की उस रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े हो गए है जिसमें कहा गया था कि पीछले 10 सालों में भारत में 27 करोड़ लोग ग़रीबी रेखा से ऊपर निकलने में कामयाब रहे है। इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की ख़ूब तारीफ़ की थी।

अगर मनमोहन सरकार के समय ग्लोबल हंगरी इंडेक्स को देखे तो उस समय भारत 55वे स्थान पर था। लेकिन पीछले चार सालों में भारत की रैंकिंग काफ़ी नीचे आयी है। 2015 में भारत 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें पायदान पर आ गया था। इस बार रैंकिंग 3 पायदान और नीचे गिर गई। दुनिया में भूखमरी की स्थिति का पता करने के लिए 2006 में ग्लोबल हंगरी इंडेक्स की शुरुआत हुई थी।

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वेल्ट हंगरलाइफ़ नाम के एक जर्मन संस्थान ने 2006 में पहली बार ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी किया था। यह इसका 13वा संस्करण है। इस रिपोर्ट में बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका की स्थिति भारत से कही बेहतर है। इस इंडेक्स में श्रीलंका 67वे, नेपाल 72वे और श्रीलंका 86वे स्थान पर है। वही पाकिस्तान की स्थिति भारत से भी बदतर है। वह 106वे स्थान पर है। जबकि चीन को 25वा स्थान मिला है। इस लिस्ट में बेलरूस ने टॉप किया है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के तमाम देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत ब्योरा होता है।  इसमें लोगों को मिल रहे खाद्य पदार्थ, उसकी गुणवत्ता, मात्रा और उसकी कमियों का ब्योरा शामिल होता है। ग्लोबल हंगरी इंडेक्स रैंकिंग हर साल अक्टूबर में जारी होती है।

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