Monday, November 29, 2021

यह टॉपर तिहाड़ जेल के बाहर बैठकर करती थी पढ़ाई

- Advertisement -

समा शब्बीर शाह ने जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 97।8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। समा श्रीनगर में अठवाजान स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं।

सीबीएसई टॉपर होने से पहले समा की पहचान एक अलगाववादी नेता की बेटी के रूप में रही है। उनके पिता शब्बीर शाह जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं, उन्हें साल 2017 मे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और फिलहाल वे दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में बंद हैं।

समा भविष्य में कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं। समा ने इसकी एक वाजिब वजह भी बताई। वे कहती हैं कि उन्हें अपने पिता के केस के सिलसिले में कई दफा कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़े। इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका में होने वाले भ्रष्टाचार और भेदभाव को बेहद करीब से देखा है।

समा कहती हैं, ”मैंने देखा कि न्यायपालिका में बहुत अन्याय होता है, हमने तो शुरू से यही पढ़ा और सुना था कि न्यायपालिका सरकार का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, यह बहुत ही ताकतवर संस्था है लेकिन मेरा अपना निजी अनुभव बताता है कि यहां बहुत सी बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता, कई मौकों पर अन्याय होता होता है। इसीलिए मैंने सोचा कि मैं कानून की पढ़ाई कर दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय होता दिखेगा उसे कम करने का काम करूंगी।

समा कहती हैं, ”मुझे इतनी तो उम्मीद थी कि मेरे अच्छे नंबर आ जाएंगे लेकिन मैं राज्य की टॉपर बन जाऊंगी यह कभी नहीं सोचा था।

कश्मीर के हालात और अपनी निजी परेशानियों को याद करते हुए समा बताती हैं, ”कश्मीर में जो हालात होते हैं उसका ट्रॉमा तो रहता ही है लेकिन मेरे लिए तो निजी तौर पर मानसिक और भावनात्मक परेशानियां थीं। मैं पिछले एक साल अपने बाबा (पिता) से नहीं मिली हूं, इस वजह से नकारात्मक विचार आते रहते थे।”

वे आगे बताती हैं, ”इन्हीं हालातों के बीच मैंने सोचा कि मुझे अपने पिता को अपनी वजह से गर्व महसूस करवाना है, उन्होंने पिछले लंबे वक्त से संघर्ष किया है, इसलिए मैं बेहतर पढ़कर उन्हें अच्छा महसूस करवाना चाहती थी।”

‘तिहाड़ के गेट के बाहर पढ़ती थी’

किसी भी परीक्षा का सामना करने के लिए हमें कहीं न कहीं से प्रेरणा लेनी होती है। समा ने अपनी प्रेरणा का स्रोत अपने पिता को बताया है।

लेकिन उनके जेल में बंद होने की वजह से वे उनसे ज़्यादा मिल-जुल नहीं पाती हैं।

इस संबंध में समा कहती हैं, ”मैं परीक्षाओं की तैयारी से पहले बाबा से मिलने दिल्ली गई थी। जब उनसे मिलने जाते हैं तो तिहाड़ में पूरा दिन वहीं गुज़र जाता है। क्योंकि लगभग 5 घंटे तक इंतज़ार करना होता है उसके बाद 10 मिनट की मुलाक़ात हो पाती है।”

समा बताती हैं, ”इंतज़ार की इसी घड़ी में मैं अक्सर गाड़ी में बैठकर या यात्रा करते वक्त पढ़ती रहती थी। मैं जेल प्रशासन से यह भी कहती थी कि मुझे उन पांच घंटों तक किताब भीतर ले जाने दी जाए जब तक हम इंतज़ार कर रह हैं लेकिन प्रशासन इसकी इजाज़त नहीं देता था। तब मैं तिहाड़ जेल के गेट के बाहर बैठकर पढ़ाई करती थी।”

है। इसीलिए मैंने सोचा कि मैं कानून की पढ़ाई कर दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय होता दिखेगा उसे कम करने का काम करूंगी।

समा के घर में पिछले एक साल से बेहद तनावपूर्ण माहौल था। उनके पिता जेल में बंद हैं। ऐसे माहौल में राज्य की टॉपर बनना और इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करना समा के लिए कितना मायने रखता है।

समा की मां डॉक्टर बिलकिस ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की कामयाबी पर फख्र है क्योंकि इतने बुरे हालातों में उन्होंने यह कामयाबी हासिल की है।

उन्होंने बताया कि उनके पति ने हमेशा उन्हें यही कहा कि बच्चों को अच्छा से पढ़ाना है और उनका भविष्य बेहतर बनाना है।

क्या हैं शब्बीर शाह पर आरोप?

शब्बीर शाह पर आरोप हैं कि उन्हें हवाला से चरमपंथी गतिविधियों को बढावा देने के लिए पैसे मिलते थे और प्रवर्तन निदेशालय के ज़रिए बार-बार बुलाए जाने के बावजूद भी वो हाज़िर नहीं हुए, जिसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने उनके ख़़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, साल 2005 में दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद असलम वानी नाम के हवाला डीलर को 63 लाख रुपयों के साथ गिरफ़्तार किया था।

वानी के मुताबिक़ इसमें से 50 लाख रुपए शाह और 10 लाख जैश-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर अबू बक़र को मिलने थे। बाक़ी उसका कमीशन था।

वानी ने बताया था कि उसके माध्यम से शब्बीर शाह को 2।25 करोड़ रूपए मिले थे। शाह के ख़िलाफ़ मनी लाउंड्रिंग क़ानून में मुक़दमा दर्ज है।

शब्बीर शाह पूरे मामले को राजनीतिक बताते रहे हैं और कहते हैं कि भारत सरकार ये बहुत ख़तरनाक़ खेल खेल रही है और न सिर्फ़ उनके साथ बल्कि दूसरे कश्मीरी अलगाववादी नेताओं जैसे गिलानी को भी बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles