कश्मीर पर बोलना मलेशिया को पड़ा महंगा, पाम तेल के आयात पर भारत ने लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली. भारत सरकार ने देश के पाम ऑयल निर्यातकों और रिफायनरीज काे एक मोखिक आदेश में कहा कि वे मलेशिया से पाम तेल खरीदने के बजाय इंडोनेशिया से अधिक पाम तेल खरीदें।

विदेश व्‍यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की अधिसूचना में कहा गया है कि आयात नीति को संशोधित करते हुए रिफाइंड ब्‍लीच्‍ड डियोडोराइज्‍ड पॉम ऑयल और रिफाइंड ब्‍लीच्‍ड डियोडोराइज्‍ड पॉमोलीन के आयात को मुक्‍त श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब ये हुआ कि इन तेलों के आयात के लिये अब आयातकों को केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी अथवा इसके लिये लाइसेंस लेना होगा।

भारत सालाना तकरीबन 1.5 करोड़ टन वनस्पति तेल खरीदता है। इसमें से पाम तेल की हिस्सेदारी 90 लाख टन और सोयाबीन और सनफ्लावर तेल की हिस्सेदारी 60 लाख टन है। भारत में 30 फीसदी पाम ऑयल मलेशिया से और 70 फीसदी इंडोनेशिया से आयात किया जाता है।

बता दें कि मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए हटाने का विरोध किया था। मोहम्मद ने नागरिकता कानून में संशोधन का भी विरोध किया था। जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने मलेशियाई राजदूत को बुलाकर साफ कर दिया था कि भारत इसे आंतरिक मामलों में दखल मानता है।

ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार ने मलेशिया को सबक सिखाने के लिए ये फैसला लिया है। दरअसल, मलेशिया एक साल में 1.9 करोड़ टन पॉम ऑयल का उत्‍पादन करता है।  2019 में करीब पांच लाख टन पॉम ऑयल मलेशिया से आयात किया गया था। मलेशिया को जीडीपी का 2.8 फीसदी पॉम ऑयल एक्सपोर्ट से ही प्राप्त होता है। यह उसके कुल निर्यात का 4.5 प्रतिशत है।

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