24 सितंबर 2002 को अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार हुए मुफ्ती कय्यूम मंसूरी सहित पांच जनों को सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई 2014 को बरी कर दिया था. इस मामलें को लेकर अब कय्यूम ने हर्जाने की मांग उठाई हैं.

बेगुनाह होने के बाद भी 11 साल सलाखों के पीछे गुजारने के बाद अब सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल कर आपीएस अधिकारी जीएल सिंघल, रिटायर्ड डीएसपी वीडी वानर, इंस्पेक्टर आरआई पटेल, डीआईजी वंजारा और गुजरात सरकार से 5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है.

मंसूरी के वकील एमएम शेख ने इस बारें में कहा कि यह हर्जाना बिना किसी अपराध के 11 वर्षों की सजा की बदले में मांगा जा रहा है, जब कय्यूम हर पल डर के साथ जी रहे थे. उनके परिवारवालों को भी उनके न होने की वजह से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. इस दौरान उनकी कमाई कुछ न थी और कानूनी लड़ाई में लगातार खर्च हो रहा था.

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मंसूरी ने ‘Eleven Years Behind Bars (सलाखों के पीछे के 11 साल)’ नाम से किताब लिखी हैं. जिसमे उन्होंने अपने जेल में बिताये दिनों के बारें में लिखा हैं.

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