2002 के दंगों से जुड़े हुए बिलकिस बानो बलात्कार के मामले में सुनवाई करते हुए देश की सर्व्वोच अदालत ने गुजरात सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सजायाफ्ता पुलिसवाले व डॉक्टर काम कैसे कर सकते हैं?

कोर्ट ने अधिकारियों के ख़िलाफ़ की गयी विभागीय कार्रवाई से उसे चार सप्ताह के भीतर अवगत कराने का आदेश दिया है. दरअसल, बिलकिस बानों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि जिन चार पुलिसवालों व दो डॉक्टरों को हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था. उन्हें सरकार ने वापस काम पर रख लिया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि 2002 बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में सबूतों से छेड़छाड़ के दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों को वापस काम पर कैसे रखे जा सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने राज्य सरकार से 4 हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा.. साथ ही कोर्ट ने बिलकिस को मुआवजे के लिए अलग से याचिका दाखिल करने को भी कहा है.

ध्यान रहे  इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी थी जबकि पुलिसकर्मियों और चिकित्सकों सहित सात व्यक्तियों को बरी करने का निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया था. इसके बाद पुलिस अधिकारी आरएस भगोरा सहित चार अन्य पुलिस कर्मियों और दो डॉक्टरों की याचिका पर जल्दी सुनवाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी थी.

बता दें कि साल 2002 में अहमदाबाद में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान भीड़ ने बिलकिस बानो के घर पर हमला कर दिया था जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और भीड़ ने गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामुहिक दुष्कर्म किया था.

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