Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

कालेधन पर आरटीआई ने खोली मोदी सरकार की पोल, वित्त मंत्रालय ने भेजा जवाब, कालेधन वालो के खिलाफ नही हो सकती एफआईआर

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नई दिल्ली | यूपीए-2 के शासनकाल के दौरान पुरे देश में कालेधन को लेकर खूब आक्रोश पैदा हुआ था. जिसका फायदा बाबा रामदेव से लेकर बीजेपी तक ने उठाया. इसी को मुद्दा बनाकर बीजेपी ने कांग्रेस पर खूब हमला बोला. 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के समय नरेन्द्र मोदी ने देश से वायदा किया था की केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कालाधन रखने वालो के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी और एक एक को जेल में डाला जाएगा.

सरकार बनने के साढ़े तीन साल बाद भी बीजेपी और मोदी सरकार यही बात दोहराती है. हालाँकि अभी तक एक भी शख्स कालाधन रखने के आरोप में गिरफ्तार नही हुआ. जबकि मोदी और उनके सभी मंत्री इस मुद्दे पर अपनी पीठ थपथपाने का कोई भी मौका नही छोड़ते. कार्यवाही के नाम पर मोदी सरकार हमेशा दो चीजे गिनाती है. एक है नोट बंदी और दूसरा एसआईटी का गठन. हालाँकि वादे अभी भी बदस्तूर जारी है.

लेकिन एक आरटीआई के जवाब में वित्त मंत्रालय ने जो जवाब दिया है वो कालेधन पर मोदी सरकार के सभी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है. वित्त मंत्रालय ने बताया की कालाधन रखने वालो के खिलाफ सरकार की और से अभी तक एक भी एफआईआर दर्ज नही की गयी है क्योकि मौजूदा कानून के अनुसार ऐसे मामलो में एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान ही नही है. दरअसल दिल्ली के नीरज शर्मा ने आरटीआई के जरिये वित्त मंत्रालय से कुछ सूचना मांगी थी.

इस आरटीआई में नीरज ने पुछा था की हाल ही में पनामा पेपर्स और कालेधन के आरोपियों के खिलाफ केंद्र द्वारा गठित बहु एजेंसी समूह ने अब तक क्या कार्यवाही की है और इसमें कितने लोगो के खिलाफ एफआरआर दर्ज की गयी है. इसके जवाब में वित्त मंत्रालय ने बताया की बहु एजेंसी समूह का मुख्या कार्य पनामा पेपर्स लीक से सम्बंधित जांचों में तेज़ी लाने में मदद करना है. ये जांच कई एजेंसियां कर रही हैं. इनकम टैक्स क़ानून, 1961 और कला धन और टैक्स के क़ानून 2015 के अंतर्गत FIR दायर करने का कोई प्रावधान ही नहीं है.

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