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पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न राइटर्स फेस्टिवल 2017 को संबोधित करते हुए कहा कि 17 वीं सदी में मुस्लिम शासन के तहत भारत विश्व की 27% GDP के साथ दुनिया का सबसे अमीर देश था.

उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग पर भारत के मुस्लिमों का वर्चस्व था, जिसे अंग्रेजों ने व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया था. ब्रिटिश दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक भारत के पास उस वक्त आया, जब 17 वीं सदी में सकल घरेलू उत्पाद लगभग 27% भारत का था.

कांग्रेस नेता ने कहा कि लेकिन 200 साल से अधिक शोषण, लूट और विनाश ने भारत को तीसरी दुनिया का सबसे ग़रीब देश बना दिया. उन्होंने कहा,अंग्रेज़ों ने जब भारत पर अतिक्रमण किया तो वह एक ऐसा देश था, जो कम से कम तीन उद्योगों टेक्सटाइल, इस्पात और जहाज़ निर्माण में विश्व का नेतृत्व करता था, एक ऐसा देश था जिसके पास सब कुछ था.

उन्होंने कहा, जब 1947 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ा, तो देश की 90% आबादी गरीबी के स्तर के नीचे रह रही थी. साक्षरता दर 17% से कम थी और 1900 से 1 9 47 के बीच विकास दर 0.001% थी. उन्होंने कहा, यह तथ्य मुक्त व्यापार के नाम पर है कि ब्रिटिश आए और स्वतंत्र व्यापार को नष्ट कर दिया, जिसने भारत को वस्त्र निर्यात करने वाला प्रमुख निर्यातक बनाया था.

थरूर ने कहा, ब्रिटिश सैनिकों ने लूम या करघों को तोड़ फोड़ दिया, ताकि लोग कपड़ा नहीं बुन सकें. उन्होंने कपड़े के निर्यात पर दंडात्मक कर एवं टैक्स लगाए, जबकि ब्रिटिश कपड़े के आयात को ड्यूटी फ़्री कर दिया. ढाका और मुर्शिदाबाद जैसे औद्योगिक शहरों को उजाड़ दिया गया, यहां तक कि कई स्थानों पर तो बुनकरों के अंगूठे तक काट दिए गए ताकि वह करघों पर काम न कर सकें. उन्होंने कहा, “भारत के कपड़ा उद्योग को व्यवस्थित रूप से ब्रिटिशों द्वारा नष्ट कर दिया गया.”

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