अक्टबूर 20, 2005 को दिल्ली के सरोजिनी नगर, गोविंदपुरी और पहाड़गंज में दिवाली से पहले हुए बम धमाको लेकर गिरफ्तार किये गए तीन कश्मीरी युवकों को हाल ही में पटियाला कोर्ट ने आरोपमुक्त करार दे दिया गया था. मोहम्मद रफीक शाह और मोहम्मद हुसैन फाजिली को इस मामले में बरी कर दिया गया था. वहीँ तारीक डार को इस मामले में आतंकवाद को समर्थन देने के लिए आरोपी ठहराया गया, लेकिन हमला करने से आरोप से बरी कर दिया गया.

इस मामलें में एक और नया खुलासा हुआ हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2009 में प्राप्त नए प्रमाणों से दिल्ली पुलिस और ख़ुफ़िया एजेन्सियों को यह पता चल गया था कि दिल्ली बलास्ट के मामले में जिन तीन कश्मीरी युवकों पर मुक़द्दमा चला रहा है उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है. इसकी खबर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी इन सबूतों की खबर थी, लेकिन फिर भी इस मामले के अलावा अन्य दो मामलों में पुर्नजांच के आदेश नहीं दिए गए.

एक अन्य मामले में इलाहाबाद के फूलपुर की मस्जिद में इमाम मोहम्मद वलीउल्ला को वाराणसी के अश्वमेध घाट पर फरवरी 2005 में बम धमाके करने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. वह फिलहाल डासना जेल में कैद हैं. तीसरा मामला 2006 का जब मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके किए गए थे. लेकिन मार्च 2009 में आंध्र प्रदेश पुलिस के एटीएस के गोपनीय डोजियर के मुताबिक यह हमले इंडियन मुजाहिद्दीन ने कराए थे, इन लोगों ने नहीं.

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आंध्रप्रदेश पुलिस के डोजियर के अनुसार,  पूछताछ के दौरान संदिग्धों ने बताया था कि दिल्ली बम धमाके इंडियन मुजाहिद्दीन के चीफ आतिफ आमीन ने कराए थे, जो बाटला हाउस एन्काउंटर में मारा गया था. उसने जसोला इलाके में एक फ्लैटे किराए पर लिया था. वह लगातार आजमगढ़ आया करता था. एक बार उसकी मुलाकात सादिक (शेख) से हुई और उसे बताया कि उसका दिल्ली में बम धमाके करने का प्लान है. इसके बाद बताया गया कि शेख की आमीन से मुलाकात हुई और जिस टीम ने धमाके किए उसमें इंजियन मुजाहिद्दीन के मिर्जा शदाब बेग, मोहम्मद शकील और शाकिब निसार थे.

डोजियर में कहा गया कि आतिफ ने पहाड़गंज इलाके में प्रेशर कुकर बम रखे थे. शदाब ने सरोजिनी नगर और शकील और शाकिब ने गोविंदपुरी में धमाके किए थे. सबसे पहले तारीक डार को गिरफ्तार किया गया, इसके बाद उसी के बयान के आधार पर शाह और फाजली गिरफ्तार हुए. हालांकि किसी भी दस्तावेज में सामने नहीं आया था कि यह संदिग्ध हमले के तीन दिल्ली में नहीं थे.

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