मध्यप्रदेश के इंदौर डिस्ट्रिक कोर्ट ने मार्च 2008 में पकड़े गए सिमी नेता सफदर नागौरी समेत 11 कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुना दी. इन कार्यकर्ताओं पर भड़काऊ भाषण, देश विरोधी साहित्य रखने और ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप है.

ये सारे आरोपी फिलहाल अहमदाबाद की साबरमती केंद्रीय जेल में बंद है. इन सभी को मार्च 2008 में एक स्‍पेशल टास्‍क फोर्स ने गिरफ्तार किया था. जिसके बाद इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत में इन पर ट्रायल चला. द इंडियन एक्‍सप्रेस के अनुसार, 2001 में छात्र संगठन सिमी को बैन किए जाने से पहले, उज्‍जैन के महाकाल पुलिस थाने में नागोरी के खिलाफ 1997 में एक मुकदमा दर्ज किया गया था. उसे 11 दिसंबर, 2000 को भगोड़ा घोषित किया गया था.

नागोरी 1993 से सिमी का सदस्‍य रहा है. 2001 में संगठन पर प्रतिबंध लगने के बाद वह अंडरग्राउंड हो गया.  मार्च, 2008 में मध्‍य प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने नागोरी को उसके भाई कमरुद्दीन और सिमी के कई प्रमुख आतंकियों को गिरफ्तार किया.

शुक्रवार को अभियोजक विमल मिश्रा ने सफदर सहित सभी आरोपियों से 334 सवाल किए थे. अभियोजन पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट ने आज (27 फरवरी) फैसला सुनाने की बात कही थी. विशेष न्यायाधीश बीके पालौदा ने सोमवार को सफदर सहित 11 आरोपियों को धारा 124 के तहत देशद्रोह का आरोपी माना और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई.


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