Monday, October 18, 2021

 

 

 

दिल्ली वक्फ बोर्ड से इमामों-विधवाओं को नहीं मिल रहा वेतन, सदस्य ने की आत्मदाह की कोशिश

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दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) की और से मस्जिदों के इमामों और मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाले पेंशन बंद है। जिसके कारण सैकड़ों मस्जिदों के इमाम और मुस्लिम विधवा आर्थिक तंगी से गुजर रही है।

दरअसल, बोर्ड में कई दिन से चेयरमेन का पद खाली चल रहा है। जिसके कारण स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह के कर्मचारियों (Staff) को महीनों से सैलरी नहीं मिल पा रही। इसी बीच बोर्ड की सदस्य रजिया सुल्ताना ने सोमवार को बोर्ड के कार्यालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश की।

कार्यालय के बाहर ही बोर्ड के कर्मचारी अपने लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। वक्फ बोर्ड के कर्मचारी पांच नवंबर से ही कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सुल्ताना ने पहले धमकी दी थी कि अगर कर्मचारियों को फरवरी से लंबित उनका वेतन नहीं दिया गया तो वह आत्मदाह कर लेंगी। जैसे ही उन्होंने माचिस की तीली जलाने की कोशिश की, प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया।

सुल्ताना ने कहा, ‘‘मुझे इन कर्मचारियों की पीड़ा को देखकर बहुत तकलीफ हो रही है जिन्होंने कड़ी मेहनत की और बोर्ड के लिए लाखों रुपये का राजस्व एकत्र किया। यह अफसोस की बात है कि वे अपने वेतन की मांग को लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।

बता दें कि ल्ली वक्फ बोर्ड 269 सरकारी इमाम को 18 हज़ार रुपये के हिसाब से सैलरी देता है। वहीं मौहज़िन को 14 हज़ार रुपये के हिसाब से सैलरी दी जाती है। इसके साथ ही 12 सौ प्राइवेट इमाम भी हैं। इसके अलावा 2500 रुपये के हिसाब से 800 महिलाओं को विधवा पेंशन दी जाती है, लेकिन 5 महीने से सभी की सैलरी और पेंशन बंद हैं

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