Sunday, August 1, 2021

 

 

 

फैज की कविता हिंदू विरोधी तो नहीं, आईआईटी कानपुर ने बैठाई जांच

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कानपुर: आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के छात्रों द्वारा जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के छात्रों के समर्थन में परिसर में 17 दिसंबर को मशहूर शायर फैज अहमद फैज की कविता ‘हम देखेंगे’ गाए जाने को लेकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (आईआईटी-के) ने एक समिति गठित की है, जो यह तय करेगी कि क्या फैज अहमद फैज की कविता ‘हम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ हिंदू विरोधी है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक समिति इसकी भी जांच करेगा कि क्या छात्रों ने शहर में जुलूस के दिन निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया? क्या उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की और क्या फैज की कविता हिंदू विरोधी है?

आईआईटी कानपुर के उपनिदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने बुधवार को बताया, आईआईटी के लगभग 300 छात्रों ने परिसर के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, क्योंकि उन्हें धारा 144 लागू होने के चलते बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। प्रदर्शन के दौरान एक छात्र ने फैज की कविता ‘हम देखेंगे’ गाई थी, जिसके खिलाफ वासी कांत मिश्रा और 16 से 17 लोगों ने आईआईटी निदेशक के पास लिखित शिकायत दी।

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि कविता में कुछ दिक्कत वाले शब्द हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। अग्रवाल ने बताया कि उनके नेतृत्व में 6 सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया है जो इस मामले की जांच करेगी। कुछ छात्रों से पूछताछ की गई है जबकि कुछ अन्य से तब पूछताछ की जाएगी, जब वह अवकाश के बाद वापस संस्थान आएंगे।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की जंग में स्थिति खराब हो रही है, इसलिए उन्होंने लोगों से इसे बंद करने को कहा है और उन्होंने उनकी बात मान ली है। बता दें कि यह कविता फैज ने 1979 में सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के संदर्भ में लिखी थी और पाकिस्तान में सैन्य शासन के विरोध में लिखी थी। फैज अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण जाने जाते थे और इसी कारण वे कई सालों तक जेल में रहे।

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