नई दिल्ली | बीजेपी के तेजतर्रार नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहते है. चाहे राम मंदिर मामले में दिए गए उनके बयान हो या फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ. इन दोनों ही मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपनी राय लोगो के सामने रखी. अरुण जेटली पर उनके लगातार वार ने तो प्रधानमंत्री मोदी तक को बीच में हस्तास्क्षेप करने पर मजबूर कर दिया. हालांकि इसके बाद भी उनके वार जारी रहे.

हाल ही में वो राम मंदिर निर्माण को लेकर वो काफी आक्रमक दिख रहे है. उन्होंने इसके लिए हल सुझाते हुए सुझाव दिया की अगर मुस्लिम चाहे तो हम सरयू नदी के पार मस्जिद निर्माण के लिए तैयार है. हालाँकि मुस्लिम संगठनो ने उनकी यह मांग ठुकरा दी. इसी बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने देश में शांति और एकता के लिए एक नया पासा फेंका है. उन्होंने सभी मुस्लिमो से आग्रह किया है की अगर वो यह मान ले की उनके पूर्वज हिन्दू थे हम एक हो सकते है.

इलाहाबाद में अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से आयोजित ‘लोक जीवन में भारतीय अस्मिता’ विषयक संगोष्ठी में बोलते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा की जब तक मुस्लमान अपने आप को मोहम्मद गौरी और गजनवी का वंशज मानते रहेंगे तब तक हम एक नही हो सकते. हाँ अगर वो यह मान ले की हम सब हिन्दू के वंशज है तो हम एक हो सकते है. वो माने की कश्मीर से लेकर कन्याकुमार तक सभी का डीएनए एक है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी ने राम मंदिर निर्माण पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा की जिस जगह पर रामलला पैदा हुए वही पर राम मंदिर का निर्माण होगा. स्वामी ने दोबारा मुस्लिमो को सरयू नदी पार मस्जिद बनाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा की अगर मुस्लिम चाहते है तो वो सरयू नदी पार मस्जिद बना सकते है. इसके लिए जो भी हर संभव मदद होगी वो हम करेंगे.

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