रविवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने साम्प्रदायिकता के नाम पर चल रहे दोगलेपन पर सवाल उठाते हुए कहा कि  बाबरी मस्जिद मामले में अगर कोई हिन्दू कुछ भी बोले तो उन्हें धर्मनिरपेक्ष माना जाता हैं. लेकिन वहीँ दूसरी तरफ हम राम मंदिर पर बोलते हैं तो सांप्रदायिक ठहरा दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि जब कुछ हिंदू बाबरी मस्जिद मामले की बात करते हैं तो उन्हें धर्मनिरपेक्ष कहा जाता है, लेकिन जब मैं राम मंदिर मामले पर बोलता हूं तो सांप्रदायिक करार कर दिया जाता हूं.

मुसलमानों पर हो रहे कथित राष्ट्रवादियों के हमलें पर उन्होंने कहा कि हम अपनी चॉइस से भारतीय हैं, किसी चांस से नहीं. मुसलमानों ने एक इस्लामवादी शासन के ऊपर भारत को पसंद किया है, हमें उस पर खेद नहीं है.

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इसी के साथ उन्होंने मुस्लिमों से अपील की हैं कि वे कभी भी उत्तेजित होकर भड़काऊ न बनें, क्योंकि गुस्सा कमजोरी है. इसके बजाय अपने विकास के रास्ते के रोड़ों को दूर करने में संयम दिखाएं.

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