नई दिल्ली | धार्मिक भावनाए भड़काने के मामले में न जाने कितने लोग रोजाना अदालतों के चक्कर काटते है. इनमे से कुछ लोग जानबूझकर लोगो की धार्मिक भावनाए भड़काते है जबकि कुछ अनजाने में यह अपराध कर बैठते है. अब फिल्म ‘पीके’ का ही उदहारण ले ले, जिसमे एक सन्देश देने के मकसद से हिन्दू देवी देवताओं के बारे में टिप्पणी की गयी है.

इस फिल्म को पुरे हिंदुस्तान ने जबरदस्त प्यार दिया है लेकिन इस फिल्म से कुछ लोगो की धार्मिक भावनाए आहत हो गयी और फिल्म अभिनेता आमिर खान के खिलाफ धार्मिक भावनाए भड़काने का मामला दर्ज हो गया. इस तरह के मामलो में सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है. उन्होंने कहा की अगर कोई शख्स अनजाने में या गलती में किसी धर्म का अपमान कर बैठता है तो उसे अपराध नही माना जा सकता.

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा की ऐसे मामलो में धारा 295A के तहत मामला दर्ज नही किया जा सकता. अगर ऐसा होता है तो यह कानून का दुरूपयोग होगा. कोर्ट ने 295A के दुरुपयोग पर भी चिंता जाहिर की. बताते चले की 295A धार्मिक भावनाए भड़काने के आरोप में लगाई जाती है, जिसमे आरोप साबित होने पर न्यूनतम तीन साल की सजा सुनाई जाती है.

दरअसल 2013 में एक बिज़नस मैगजीन ने धोनी की तस्वीर को कवर पेज पर छापा था. इसमें धोनी को भगवान् विष्णु के तौर पर दिखाया गया था. इसी मामले में धोनी के खिलाफ धार्मिक भावनाए भड़काने का मामला दर्ज किया गया था. जिसको धोनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस पर कोर्ट ने कहा की अनचाहे तरीके से, लापरवाही में या बिना किसी खराब मंशा के अगर धर्म का अपमान होता है या किसी वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाएं भड़कती हैं तो यह काम कानून की इस धारा के अंतर्गत नहीं आता.

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