मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने गैस विवाद मामले में भारत सरकार के खिलाफ आर्बिट्रेशन केस को जीत लिया है। इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल (International Arbitration Tribunal) ने भारत सरकार के 1.55 अरब डालर के भुगतान दावे को खारिज कर दिया है। साथ ही जिसमें कहा गया था कि उन्होंने दूसरों के तैल-गैस कुओं से कथित तौर पर गलत तरीके से गैस निकालने की कोशिश की है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नियामकीय सूचना में कहा कि तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने बहुमत के आधार पर रिलायंस और भागीदारों को 83 लाख डालर का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। दो ने फैसले के पक्ष में राय जाहिर की थी जबकि एक इसके खिलाफ थे।

सिंगापुर के न्यायाधीश लारेंस बो की अध्यक्षता वाले मध्यस्थता अदालत ने सरकार की इस मांग को खारिज कर दिया कि रिलायंस और उसके भागीदारों ब्रिटेन की बीपीएलसी और कनाडा की निको रिर्सोसेज को गलत तरीके से ओएनजीसी को आबंटित ब्लॉक से गैस निकालने के मामले में सरकार को भुगतान करना चाहिए।

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बता दें कि तेल मंत्रालय ने 4 नवंबर 2016 को रिलायंस, बीपी और निको की संयुक्त कंपनी के खिलाफ करीब 9,300 करोड़ रुपये का दावा ठोंका था। सरकार का दावा था कि रिलायंस ने लगातार सात सालों से 31 मार्च 2016 तक ओएनजीसी के ब्लॉक से गैस का दोहन किया है। ये मात्रा 338.332 मिलियन ब्रिटिश थर्मल गैस युनिट के बराबर थी। ये ब्लॉक रिलायंस के केजी-डी6 तेल ब्लॉक के पास का इलाका था।

ओएनजीसी का यह ब्लॉक आंध्र प्रदेश के कृष्णा गोदावरी बेसिन में स्थित है, जिससे रिलायंस 7 साल के दौरान निकाली थी। नवंबर 2016 में सरकार द्वारा कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया था।

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