प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत चलाये जा रहे शौचालय अभियान की आलोचना करना 1994 बैच की महिला आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी को महंगा पड़ गया हैं. राज्य की शिवराज सरकार ने उनके खिलाफ कारवाई शुरू कर दी हैं. हालांकि उनके समर्थन में अब बीजेपी सांसद भी आ गए हैं.

दरअसल,  द हिन्दू  अख़बार में लिखे अपने लेख में आईएएस दीपाली ने केंद्र सरकार के खुले में शौच (ओडीएफ) अभियान को औपनिवेशिक मानसिकता की गुलामी करार देते हुए कहा था कि ”योजना उन गोरे लोगों के कहने पर लाई गई, जिनकी वॉशरूम हैबिट भारतीयों से अलग है. गोरे कहते हैं कि खुले में शौच करना गंदा है तो हम इतना बड़ा अभियान ले आए.

उन्होंने आगे लिखा, ग्रामीण क्षेत्रों में खेत पर छोड़ी गई शौच तेज धूप में सूख जाती है, अगले दिन वह खाद बन जाती है. अगर ये लोग टैंक खुदवाकर शौचालय बना भी लें तो उसमें लगने वाला पानी कहां से लाएंगे. ग्रामीणों को लंबा फासला तय करके पानी लाना होता है. इतनी मेहनत से अगर कोई दो घड़े पानी लाता है तो क्या वह एक घड़ा टायलेट में डाल सकता है? बिलकुल नहीं.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

दीपाली का ये सवाल उठाना उनके लिए परेशानी का सबब बन गया हैं. उनका इस तरह सवाल उठाना सर्विस रूल्स के खिलाफ बताया जा रहा है. आचरण संहिता की कंडिका-7 के तहत कोई भी लोकसेवक सरकारी नीति, कार्यक्रम के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आलोचना नहीं कर सकता है.

ऐसे में अब उन पर काररवाई हो सकती हैं. सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव रश्मि अरुण शमी का कहना है कि पूरे मामले का परीक्षण कराया जा रहा है.

Loading...