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केरल के चर्चित केस हादिया उर्फ़ अखिला अशोकन मामले में आज फिर देश की सर्व्वोच अदालत के समक्ष सुनवाई हुई.  दौरान हादिया की और से हलफनामा पेश किया गया. जिसमे उसने स्पष्ट तौर से कहा कि वह मुसलमान है और मुसलमान के तौर पर ही अपनी जिंदगी जीना चाहती है.

ध्यान रहे इससे पहले 22 फरवरी को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच के समक्ष हादिया ने कहा था कि वह आजादी के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहती है और वह शफीन जहां की पत्नी ही बनी रहना चाहती है.

दरअसल, हदिया के पिता ने शफीन जहां पर आरोप लगाया था कि उसने हदिया उर्फ अखिला को बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराकर अपनी पत्नी बना लिया है और वह उसे सीरिया भेजना चाहता है. इस मामले को लेकर केरल की राजनीति में भूचाल आ गया था. जिसके बाद इस पुरे मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी.

हालांकि, 23 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एनआईए को हादिया और शफीन की शादी की वैधता की जांच करने का अधिकार नहीं होगा. साथ ही कोर्ट ने हादिया को अपनी आगे की मेडिकल पढाई पूरा करने की इजाजत दी थी.

कोर्ट के आदेश के बाद तमिलनाडु के सलेम होम्योपैथी कॉलेज से अपनी 11 महीने की होम्योपैथी इंटर्नशिप पूरा कर रही है. हालांकि वह अपने पूर्व नाम अखिला अशोकन से ही आगे की पढ़ाई कर रही है.

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