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कथित गौरक्षा के नाम पर हिंदुवादियों द्वारा बुलंदशहर में की गई हिंसा के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया है।

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एनएचआरसी ने मीडिया रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके इस घटना के संबंध में उपद्रवियों के खिलाफ की गई कार्रवाई समेत एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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आयोग ने नोटिस में कहा है कि यह हिंसक विरोध और उग्र भीड़ द्वारा किये उपद्रव की एक और घटना है जिससे अराजकता और संवेदनशील मुद्दों तथा स्थितियों से निपटने में प्रशासन की विफलता उजागर हो गई है। इस घटना के सिलसिले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने 87 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से 27 नामजद हैं और 60 अज्ञात। कुछ आरोपी बजरंग दल, भाजपा और विहिप जैसे संगठनों से जुड़े हैं। मुख्य आरोपी बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज है। स्याना में भाजपा यूथ विंग का अध्यक्ष शिखर अग्रवाल और विहिप कार्यकर्ता उपेंद्र राघव भी नामजद हैं। यह सभी फरार हैं।

इसी बीच, इंस्पेक्टर सुबोध की पत्नी रजनी और बहन सुनीता ने आरोप लगाया कि दादरी के अखलाक हत्याकांड की जांच के कारण साजिश के तहत उनकी हत्या की गई है। सुबोध कुमार की पत्नी ने कहा कि, ‘उन्होंने (सुबोध कुमार) हमेशा ईमानदारी से काम किया और खुद ही सारी जिम्मेदारियां संभाली।’ उन्होंने कहा कि, ‘ऐसा हादसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी उन्हें दो बार गोली लग चुकी है। लेकिन अब कोई उन्हें इंसाफ नहीं दे रहा।’ उन्होंने कहा कि, ‘ इंसाफ तभी होगा जब हत्यारे मार दिए जाएंगे।’

सुबोध कुमार सिंह के परिवार ने सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार से नाराजगी जताते हुए कहा कि सीएम के पास उनके परिवार से मिलने के लिए फुर्सत नहीं है। उनके राज में पुलिस पर हमले हो रहे हैं और वह अभी तक चुप हैं।इससे पहले सुबोध कुमार की बहन का बयान भी सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा कि वो अखलाक मामले की जांच से जुड़े थे इसलिए उनकी हत्या की गई है। उनकी हत्या पुलिस की साजिश का नतीजा है।

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