नोटबंदी के बाद देश में पैदा हुए मुश्किल भरे हालात कब तक सामान्य होंगे इस बारें में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल स्टैंडिंग कमिटी ऑफ फाइनेंस को इस बारें में कुछ भी नहीं बता पाए.

वित्त मामले की स्थायी समिति के सदस्य टीएमसी के सुगत रॉय ने बताया कि आरबीआई गवर्नर हमें यह बताने में असफल रहे कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास कितने पैसे आए. उर्जित पटेल ने यह भी नहीं बताया कि हालात कब तक सामान्य होंगे. सुगत रॉय के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी बचाव की मुद्रा में थे.

स्टैंडिंग कमिटी ऑफ फाइनेंस ने आरबीआई गवर्नर से केवल 6 सवाल पूछे थी जिनमे से केवल उन्होंने केवल दो सवालों के ही जवाब दिए. पहला सवाल नए नोटों के चलन को लेकर जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद अभी तक 9.2 लाख करोड़ रुपए के नए करंसी नोट मार्केट में पेश किए जा चुके हैं.

दुसरा सवाल नोटबंदी के फैसले को लेकर था जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले साल जनवरी से ही सरकार और सेंट्रल बैंक के बीच नोटबंदी के बारे बातचीत चल रही थी. पटेल के इस सवाल के जवाब पर उनकी आलोचना भी हो रही हैं.

दरअसल, आरबीआई ने एक पैनल को इससे पहले जानकारी दी थी कि सरकार ने नोटबंदी से ठीक एक दिन पहले 7 नवंबर को सेंट्रल बैंक के बोर्ड से नोटबंदी पर विचार करने को कहा था, जिसके बाद अगले ही दिन आरबीआई ने नोटबंदी का फैसला लिया.

इन सवालों के जवाब नहीं दे पाए उर्जित पटेल

  1. नोटबंदी को लागू करने में आरबीआई की भूमिका कितनी अहम रही। नोटबंदी के दौरान जितने फैसले लिए गये, उनमें सरकार ने कितनी बार आरबीआई से सलाह मशविरा किया।
  2. नोटंबदी के दौरान कितने पुराने नोट बैंकों में जमा हुए। इसका ब्यौरा आरबीआई के पास है।
  3. नोटबंदी के दौरान क्या आरबीआई की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रही। इसकी स्वायत्तता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
  4. बैंकों की स्थिति कब सामान्य होगी? कब बैंक सामान्यत तरीके से काम करना शुरू करेंगे।

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