कंप्‍यूटर डेटा एक्‍सेस के कारणों को बताने से गृह मंत्रालय का इनकार

केंद्र सरकार ने 10 खुफिया और सुरक्षा एजेंसियाें को देश के किसी भी कंप्यूटर की निगरानी करने का अधिकार देने के कारण का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आरटीआई से मांगी गई जानकारी के जवाब में कहा कि यह उच्च गोपनीय सूचना है।

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने यह जानकारी मांगी थी। मंत्रालय ने कहा कि यह सूचना गोपनीय श्रेणी की है। इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि आरटीआई एक्ट की धारा 8 (1) (ए), (जी) और (एच) के जरिए ऐसी सूचना काे आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है।

गौरतलब है कि धारा 8 (1) (ए) ऐसी सूचना का खुलासा नहीं करने से छूट देता है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा, सामरिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेश संबंध को प्रभावित करता हो।

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नायक ने कहा कि सीपीआईओ ने सरकार के दैनिक कार्यों के बारे में पारदर्शी होने की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने किसी विशेष कंप्यूटर के बारे में सूचना नहीं मांगी थी, जो दिसंबर 2018 के आदेश में सूचीबद्ध 10 एजेंसियों में किसी द्वारा जांच की जा रही हो।

उन्होंने कहा कि यह कह कर कि उनकी जिज्ञासा प्रश्नों के रूप में है और सूचना नहीं मांगी है, सीपीआईओ ने एक और गलती की है। गौरतलब है कि दिसंबर 2018 के अपने एक आदेश के जरिए गृह मंत्रालय ने 10 खुफिया संगठनों को आईटी एक्ट,2000 के तहत किसी भी कंप्यूटर से डाटा हासिल करने का अधिकार दिया था।

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