Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

CAA पर बोले इतिहासकार इरफान हबीब – अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं हुआ ऐसी बर्बरता

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नागरिकता कानून 2019 के खिलाफ देश के कई हिस्सों में हुए प्रदर्शन के बाद हुई पुलिस कार्रवाई को प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब ने ब्रिटिश राज से भी बर्बर बताया है।

हबीब ने बुधवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हाल ही में सार्वजनिक भावनाओं के प्रकोप को केवल एक “मुस्लिम आक्रोश” के रूप में देखना गलत होगा क्योंकि यह अंततः सभी को प्रभावित करेगा और खासकर आधुनिक राज्य के रूप में भारत के विचार को सबसे ज्यादा। देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रजों के काल में भी हमने इस तरह से असहमति की आवाज का दमन होते नहीं देखा था।

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लोगों के विरोध को कुचलने के ऐसे प्रयासों पर चिंता हो रही है क्योंकि विरोध का अधिकार एक लोकतांत्रिक समाज का मूल्य है। उन्होंने कहा कि अंग्रजों के समय में भी ब्रिटिश पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के प्रति ऐसा अमानवीय रवैया नहीं दिखाया था जैसा कि देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान देखा गया है।

हबीब ने जोर देते हुए कहा कि पूरे देश में बड़ी संख्या में हिंदू और अन्य समुदाय इस विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह सत्तारूढ़ सोच के लिए उपयुक्त होगा यदि यह विरोध केवल हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के चश्मे से देखा जाता है। प्रख्यात इतिहासकार ने कहा कि यह संघर्ष भारत और लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है।

हबीब ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई कुछ नीतियां हिंदुत्व आंदोलन की दीर्घकालिक परियोजना की अभिव्यक्ति हैं जो काफी हद तक असंतोष और विरोध को दबाने की नीति पर टिकी हुई हैं। साथ ही प्रोफेसर ने कहा कि आज भारत में जो हो रहा है, दुर्भाग्य से विभाजन के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा था उससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा पाकिस्तान के शासक वर्गों की तरह ही वर्तमान भारतीय शासकों को पता है कि धर्म जनता की भावनाओं को उत्तेजित करता है और उनकी राजनीतिक शक्ति इस कथा पर टिकी हुई है।

सीएए पर सार्वजनिक आक्रोश के अचानक फैलने की जड़ों की व्याख्या करते हुए, हबीब ने कहा कि मुसलमानों में काफी समय से आक्रोश व्याप्त है। हालांकि यह नाराजगी पिछले कुछ दिनों के दौरान ही सामने आई है क्योंकि अब वे लोग ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा गंभीर रूप ले रहा है जैसा कि सरकार के कुछ हालिया फैसलों में भी देखा जा सकता है।

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