असम में एनआरसी ड्राफ्ट पर मोदी सरकार की दोगली नीति साफ़ जाहीर हो रही है। बीजेपी एनआरसी में नाम नहीं होने पर मुस्लिमों को घुसपेठिया करार देते हुए उन्हे देश से निकालने की तैयारी कर रही है टी दूसरी और उन हिंदुओं को बसाने मे जुटी है। जो न केवल इस देश के नागरिक नहीं बल्कि उनका नाम एनआरसी में भी नहीं है।

हफपोस्ट के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया कि, “हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हिंदू अप्रवासियों को पहले आश्रय शिविरों में रखा जाएगा और फिर बुनियादी ढ़ाचा तैयार कर उनका पुर्नवास किया जाएगा। यदि आसाम के लोग किसी तरह का मुद्दा बनाते हैं तो उन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा।”

एक अन्य भाजपा कार्यकर्ता ने बतया कि, “सरकार एनआरसी को लेकर जिसमें तीन चरण हैं, पहला पहचान करना, दूसरा मतदाता सूची से नाम हटाना और तीसरा निर्वासन है, को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। अभी पहला चरण ही हुआ है, जिसमें लोगों की पहचान की गई है। यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पूर्ववर्ती कांग्रेस और असम गण परिषद की सरकार ने ऐसा नहीं किया।”

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इतना ही नहीं बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लाने का दावा कर रही है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी राज्य में सत्ता में आई तो वह पश्चिम बंगाल के लिए अलग सिटिजन रजिस्टर बनाएंगे और देश से अवैध प्रवासियों को बाहर करेंगे।

बता दें कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) सोमवार को जारी किया गया है। जिसके तहत 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार छह सौ सात लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में योग्य पाकर शामिल किया गया है और 40.07 लाख आवेदकों को इसमें जगह नहीं मिली है।

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