हिंदुओं के दूसरी शादी करने को लेकर विधि आयोग ने सिफारिश है कि हिन्दुओ द्वारा इस्लाम धर्म अपना कर दूसरी शादी करने पर रोक लगाने का कानून लाया जाये।

लॉ पैनल का कहना है कि ऐतिहासिक आंकड़ों से पता चलता है कि तमाम हिंदुओं ने दूसरी शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपना लिया। पैनल ने कहा है कि इसके खिलफ कानून है, लेकिन उसके बाद भी ऐसा जारी है। आईपीसी के सेक्शन 494 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी नहीं रचा सकता। ऐसा करने पर उसे 7 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।

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आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक तथ्य बताते हैं कि हिंदुओं में साथी के जिंदा रहते हुए दूसरी शादी का प्रचलन जारी है। यही नहीं आंकड़ों के मुताबिक तमाम लोगों ने दूसरी शादी करने के लिए हिंदू से इस्लाम में धर्म परिवर्तन भी किया। वर्ष 1994 में सरला मुद्गल बनाम भारत सरकार मामले में भी इससे संबंधित बात सामने आई थी।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ऐसा तब भी हो रहा है, जब यह स्पष्ट कानून है कि धर्मांतरण के बाद ऐसी कोई भी शादी मान्य नहीं होगी, अगर धर्म बदल चुके व्यक्ति के पार्टनर ने ऐसा नहीं किया है। दोनों व्यक्तियों की शादी जिस धर्म में हुई थी, उसके नियम तब तक चलते रहेंगे, जब तक दोनों खुद खुद धर्म नहीं बदल लेते।

लॉ पैनल का अब कहना है कि ऐसे में कानून में स्पष्टता लाने के लिए यह बहुत जरूरी है कि इस पर बिल्कुल स्पष्ट नियम लाया जाए। इससे जुड़े अलग-अलग मामले देखने से अच्छा है कि बिल्कुल साफ नियम बना दिया जाए।

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