हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष की शादी अवैध, संतान को पिता की संपत्ति पाने का हक: सुप्रीम कोर्ट

11:23 am Published by:-Hindi News

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि हिंदू महिला की मुस्लिम पुरुष के साथ शादी ‘नियमित या वैध’ नहीं है, लेकिन ऐसे विवाह से जन्मी संतान वैध है। यह संतान पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार मानी जाएगी।

जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस एम एम शांतनगौदर की बेंच ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत हाई कोर्ट ने कहा था कि दंपती (मोहम्मद इलियास और वल्लीअम्मा) का बेटा जायज है तथा कानून के मुताबिक पिता की संपत्ति में हिस्सा पाने का हकदार है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए फैसले में निष्कषर्ष रूप में कहा, एक मुस्लिम पुरष की किसी मूर्तिपूजक या अग्नि की उपासक महिला से शादी न तो वैध है और न ही शून्य, बल्कि वह सिर्फ अनियमित विवाह है। ऐसे विवाह से पैदा हुआ बच्चा पिता की संपत्ति में हिस्से का हकदार है।

शीर्ष कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि हिंदू मूर्ति पूजा करते हैं, जिसमें प्रतिमा या तस्वीर शामिल है, उन पर पुष्प चढ़ाते हैं, उन्हें सजाते हैं। ऐसे में किसी हिंदू महिला का मुस्लिम से निकाह अनियमित माना जाएगा। ऐसी अनियमित शादी का कानूनी प्रभाव यह होगा कि रिश्ता टूटने की दशा में पत्नी मेहर की राशि पाने की तो हकदार होगी लेकिन वह पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकेगी।

वहीं इस दंपति से जन्मा बच्चा अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा लेने का पात्र होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दूसरी ओर शादी शून्य घोषित होने का मतलब है कि दोनों पक्षों और संतान को किसी संपत्ति के अधिकार नहीं होंगे।

यह विवाद शमशुद्दीन और उसके चचेरे भाइयों के बीच का है। शमशुद्दीन मुस्लिम पिता मोहम्मद इलियास और हिंदू महिला वल्लीअम्मा की संतान हैं। ट्रायल कोर्ट और बाद में केरल हाई कोर्ट, दोनों ने ही शमशुद्दीन को वैध संतान मानते हुए उन्हें संपत्ति का हकदार माना था। हालांकि, चचेरे भाइयों की दलील थी कि शमशुद्दीन की मां की मोहम्मद इलियास से कानूनी तरीके से शादी नहीं हुई और वह शादी के वक्त हिंदू थी।

हालांकि, भाइयों की अपील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसलों को जायज ठहराया।

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