Saturday, October 23, 2021

 

 

 

एक-दूसरे को किडनी डोनेट कर बचाई गई हिंदू महिला और मुस्लिम व्यक्ति की जान

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चंडीगढ़. देश में आज धर्म और जातिवाद का जहर ऐसा घोला जा रहा है कि लोग अब इंसानियत का भी पाठ भूलते जा रहे है। ऐसे में एक हिंदू और एक मुस्लिम परिवार ने धर्म की दीवार तोड़कर एक-दूसरे के परिवार के सदस्यों को किडनी डोनेट कर कीमती जानें बचा दीं।

बता दें कि अब्दुल अजीज (53 वर्ष), एक कश्मीरी मुसलमान पिछले एक साल से किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस पर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था। उसकी किडनी दान करने की इच्छुक पत्नी शाजिया (50 वर्ष आयु)का ब्लड ग्रुप मैच नहीं किया, इसलिए किडनी नहीं मिल पा रही थी। इसी प्रकार मंजुला देवी (42 वर्ष) और पति सुजीत कुमार(46 वर्ष ) का भी ब्लड ग्रुप मैच ना होने के कारण किडनी ट्रांसप्लांट संभव नहीं हो पा रहा था।

जिसके चलते भारत के मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के दिशानिर्देशों के अनुसार वैध किडनी दाता होने के बावजूद मंंजुला की किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रही थी। उन दोनों को स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट द्वारा आशा की एक किरण मिली, जहां ये दोनों परिवार एक-दूसरे के साथ आईकिडनी एप्प के जरिए संपर्क में आए थे। अब दोनों परिवारों के बीच एक भावनात्मक रिश्ता जुड़ गया है।

डॉ. रजंन ने कहा, ‘जब हमें वास्तविक मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं के साथ जीने का अवसर मिलता है तो हमें संतुष्टि होती है, जो धर्मों और अन्य सभी मुद्दों के चलते पैदा हुई सीमाओं से भी परे है।’   शाजिया की किडनी प्राप्त करने वाली मंजुला देवी ने कहा, ‘मैं बहुत खुशकिस्मत महसूस करती हूं कि हमारा शाजिया के परिवार से संपर्क हुआ। यह मुझे एक महान शक्ति देता है कि मानवता, सभी धर्मों से ऊपर है और सभी का सबसे बड़ा धर्म है।’

दूसरी ओर सुजीत कुमार से किडनी प्राप्त करने वाले श्री अब्दुल अजीज ने कहा, ‘अब हम जानते हैं कि किसी व्यक्ति की जरूरत के समय में मदद करना किसी के लिए सबसे बड़ा काम है। इस अदला-बदली के माध्यम से हमने जो अनुभव किया, वह मानवता, प्रेम और देखभाल के अतिरिक्त असाधारण नहीं है। हम इस संबंध में किए गए हर काम के लिए डॉ. रंजन को धन्यवाद देते हैं।’

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