लखनऊ | उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से अवैध बूचडखानो पर लगातार कार्यवाही हो रही है. इसकी वजह से काफी लोगो के रोजगार पर सीधा असर पड़ा है. सरकार के फैसले के खिलाफ मीट व्यापारी पीछले चार दिनों से हड़ताल पर है. उनका कहना है की 2012 से हमने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है लेकिन अफसरों के सुस्त रवैये के कारण न तो लाइसेंस रिन्यू किये जा रहे है और न ही नये लाइसेंस जारी किये जा रहे है.

हड़ताल के बावजूद सरकार पीछे हटती नजर नही आ रही है. सोमवार को राज्य सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने स्पष्ट किया की केवल अवैध बूचडखानो पर कार्यवाही की जा रही है. इसके अलावा चिकेन और अंडा व्यापारियों को इस कार्यवाही से अलग रखा गया है. उनको डरने की जरुरत नही है. उन्होंने यह भी कहा की अवैध बूचडखानो को बंद कराने का वादा हमारे संकल्प पत्र में भी है.

उधर सरकार की दलीलों के बावजूद इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजा है. हाई कोर्ट ने सरकार और लखनऊ नगर निगम से लाइसेंस रिन्यू नही करने के मामले में जवाब माँगा है. हाई कोर्ट ने नोटिस भेजकर लखनऊ नगर और राज्य सरकार से 3 अप्रैल तक अपने जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.

अभी तक पुरे प्रदेश में करीब 300 बूचडखानो पर कार्यवाही की गयी है. उत्तर प्रदेश की देखा देखी अब बाकी राज्यों में भी अवैध बूचाखानो को बंद कराने की आवाजे उठने लगी है. झारखंड में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार ने अवैध बूचडखानो को बंद करने का आदेश दिया है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अधिकारियो को निर्देश दिया है की 72 घंटे के अन्दर सभी अवैध बूचडखाने बंद हो जाने चाहिए.

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