बूचडखानो पर कार्यवाही को लेकर हाई कोर्ट की योगी सरकार को फटकार कहा, आप लोगो के खान पान को नही कर सकते नियंत्रित

1:20 pm Published by:-Hindi News

लखनऊ | 19 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही योगी आदित्यनाथ ने सूबे के सभी अवैध बूचडखानो को बंद करने के आदेश दे दिए. प्रशासन ने बड़ी तत्परता दिखाते हुए राज्य के सभी अवैध बूचडखानो पर सील लगा दी. यही नही गली मोहल्लो में खुली मीट की दुकाने भी बंद करा दी गयी. हाईवे या सड़क किनारे लगी उन ठेलियो को भी हटा दिया गया जिन पर खुले आम मीट बिकता था.

इसका असर यह हुआ की एक बड़ा तबका बेरोजगार हो गया और सूबे में मीट की भारी किल्लत हो गयी. सरकार की कार्यवाही के खिलाफ मीट व्यापरियों प्रदेश व्यापी हड़ताल पर चले गए जिससे हालात और बदतर हो गये. मीट व्यापारियों का आरोप है की प्रशासन पुराने लाइसेंस को भी रिन्यू नही कर रहा है. इसी को आधार बनाकर लखीमपुर खीरी के रहने वाले मीट व्यापारी ने हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दाखिल की.

इस याचिका में कहा गया की बार बार अपील करने के बाद भी उनका लाइसेंस रिन्यू नही किया जा रहा है. इसलिए हमारी जीविका पर गहरा संकट आन पड़ा है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को योगी सरकार को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा की आप लोगो के खान पान को नियंत्रित नही कर सकते. इसके अलावा कोर्ट ने मीट व्यापारियों को अलग से जगह देने की भी बात कही है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा की की संविधान के आर्टिकल 21 के अनुसार सभी लोगो को जिन्दगी जीने और उनकी पसंद का खाना खाने की आजादी है. इसलिए आप किसी के खान पान को नियंत्रित नही कर सकते. हम अवैध बूचडखाने बंद करने के पक्ष में है लेकिन एक हफ्ते के अन्दर हमारी गाइड लाइन्स के अनुसार लाइसेंस देने पर विचार किया जाए क्योकि यह किसी की रोजी रोटी से जुडा मामला है.

कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियो को भी आदेश दिया की वो मीट व्यापारियों को अलग से जगह मुहैया कराये. अदालत ने सरकार से 30 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. हालाँकि सरकार स्पष्ट कर चुकी है की केवल अवैध बूचडखानो पर कार्यवाही की जा रही है. सरकार का कहना है की वो सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशो का पालन कर रहे है जिन्होंने अवैध बूचडखानो को बंद करने का आदेश दिया है.

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